वृह्द्यवन जातक: Vriddhayavana Jataka (An Introduction)
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Book Detail:
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Author: के. के. पाठक (K.K. Pathak)
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Publisher: Alpha Publications
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Binding: Paperback
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Number of Pages: 190
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ISBN: N/A
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Languages: Sanskrit Text with Hindi Translation
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Edition: 2011
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Dimensions: 21.5 cm x 14 cm
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Weight: 170 gm
Book Descriptionपुस्तक-परिचय
फलित-ज्योतिष के पाँच दुर्लभ जातक-ग्रन्थ क्रमश: लग्न-जातक गौरी-जातक, शिवजातक, योगिनी-जातक तथा मूलयवन जातक का यह संग्रह जो विद्वतापूर्ण टिप्पणियों से परिपूर्ण है पाठकों को फलादेश करने में अत्यन्त सहायक सिद्धु हो सकता है ।
सहायक ग्रन्थ के रूप में इस रचना की उपादेयता अक्षुण्ण है ।
लेखक परिचय
इस पुस्तक के लेखक श्री के.के. पाठक गत चालीस वर्षो से ज्योतिष-जगत में एक प्रतिष्ठित लेखक के रूप में चर्चित रहे हैं । ऐस्ट्रोलॉजिकल मैगजीन, टाइम्स ऑफ ऐस्ट्रोलॉजी, बाबाजी तथा एक्सप्रेस स्टार टेलर जैसी पत्रिकाओं के नियमित पाठकों को विद्वान् लेखक का परिचय देने की आवश्यकता भी नहीं है क्योंकि इन पत्रिकाओं के लगभग चार सौ अंकों में कुल मिलाकर इनके लेख प्रकाशित हो चुके हैं । इनकी शेष पुस्तकों को बड़े पैमाने पर प्रकाशित करने का उत्तरदायित्व एल्फा पब्लिकेशन ने लिया है ताकि पाठकों की सेवा हो सके ।
आदरणीय पाठकजी बिहार राज्य के सिवान जिले के हुसैनगंज प्रखण्ड के ग्राम पंचायत सहुली के प्रसादीपुर टोला के निवासी हैं। यह आर्यभट्ट तथा वाराहमिहिर की परम्परा के शाकद्विपीय ब्राह्मणकुल में उत्पन्न हुए । इनका गोत्र शांडिल्य तथा पुर गौरांग पठखौलियार है । पाठकजी बिहार प्रशासनिक सेवा में तैंतीस वर्षो तक कार्यरत रहने के पश्चात सन् 1993 ई. में सरकार के विशेष-सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए।
''इंडियन कौंसिल ऑफ ऐस्ट्रोलॉजिकल साईन्सेज'' द्वारा सन् 1998 ई. में आदरणीय पाठकजी को ''ज्योतिष भानु'' की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया । सन् 1999 ई. में पाठकजी को ''आर संथानम अवार्ड'' भी प्रदान किया गया ।
ऐस्ट्रो-मेट्रोओलॉजी उपचारीय ज्योतिष, हिन्दू-दशा-पद्धति, यवन जातक तथा शास्त्रीय ज्योतिष के विशेषज्ञ के रूप में पाठकजी को मान्यता प्राप्त है ।
हम उनके स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जीवन की कामना करते हैं ।













