Udhyog or Samaj (Industry and Society)
Udhyog or Samaj (Industry and Society) is backordered and will ship as soon as it is back in stock.
Couldn't load pickup availability
Genuine Products Guarantee
Genuine Products Guarantee
We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.
Delivery and Shipping
Delivery and Shipping
Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.
Book Details
-
Author: मनोज छापड़िया (Manoj Chapadia)
-
Publisher: Rawat Publications
-
Language: Hindi
-
Edition: 2022
-
ISBN: 9788131612637
-
Pages: 434
-
Cover: Hardcover
-
Dimensions: 11.0 x 8.7 x 2.0 inches
About the Book
भारतीय समाज आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ औद्योगिक समाज की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती हैं, और साथ ही देश आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा की ओर तेजी से अग्रसर है। वैश्विकरण, उदारीकरण और निजीकरण के इस युग में न केवल उद्योगों के कार्यप्रणाली में बदलाव आया है, बल्कि समाज की संरचना, अंतर-व्यक्तिगत संबंधों, मनोवृत्तियों और परिवर्तन की प्रवृत्तियाँ भी औद्योगिक संबंधों से गहराई से प्रभावित हुई हैं। वर्तमान में भारतीय समाज अधिक जटिल, औपचारिक, आधुनिक और परिवर्तनशील बन चुका है।
यह पुस्तक भारत में उद्योग और औद्योगिक संगठनों की नई प्रवृत्तियों, उत्पादन प्रक्रियाओं, औद्योगिक विवादों, श्रमिक संघों के कार्य-कलापों और बाल श्रम व श्रम कल्याण जैसे विषयों की विस्तार से विवेचना करती है। इसमें औद्योगिक समाजशास्त्र की मूल अवधारणाओं से लेकर संगठनात्मक प्रक्रियाओं, श्रमिक-प्रबन्ध संबंधों, सामूहिक सौदेबाजी, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और कारखाना अधिनियम, 1948 तक के महत्वपूर्ण विषयों को समाहित किया गया है।
यह ग्रंथ समाजशास्त्र, प्रबंधन, श्रम कल्याण, प्रशासन, नीति निर्माण एवं शोध में रुचि रखने वाले शिक्षकों, छात्रों, शोधार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
लेखक परिचय
डॉ. मनोज छापड़िया समाजशास्त्र के प्रतिष्ठित विद्वान हैं। वे दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे का. सु. साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या में समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वे उत्तर प्रदेश सोशियोलॉजिकल सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी हैं और भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में नीति निर्माण की प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

