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समाजशास्त्राीय सिद्धांत: अन्तर्विषयक परिप्रेक्ष्य (Sociological Theory: Intersubjective Perspective)

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Book Details

  • Author: सुचित्रा शर्मा, अमरनाथ शर्मा, आभा विरेन्द्र

  • Publisher: Rawat Publications

  • Language: Hindi

  • ISBN: 9788131612491

  • Pages: 216

  • Cover: Hardcover

  • Release Date: 17-06-2023


About the Book

यह पुस्तक समाजशास्त्राीय अनुशीलन को पर्यावरणमुखी अनुस्थापनों के सन्दर्भ में प्रस्तुत करती है। इसमें समाज की दूरगामी समझ और गहन विवेचना की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। यह रचना व्यक्ति के मनोविज्ञानात्मक पक्ष को समाजशास्त्र के गहन प्रकारात्मक चिन्तन एवं विश्लेषण से जोड़ती है, जो इसे एक विशिष्ट आयाम प्रदान करता है।

प्रत्यक्षवादोत्तर समाजशास्त्र में सैद्धान्तिक परिकल्पनाओं की यात्रा हस्सर्ल से प्रारंभ होकर नृजातिशास्त्र तक जाती है—जो अत्यंत जटिल कार्य है। यह पुस्तक पूर्ववर्ती समाजशास्त्रीय सिद्धान्तों को समाहित करते हुए एक व्यापक विषय क्षेत्र प्रस्तुत करती है। लेखकों ने विषय को यथासंभव सारग्रहित, उपादेय और संप्रेषणीय रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।

यद्यपि समाजशास्त्र की इस नयी दिशा की विवेचना दुष्कर है, फिर भी लेखकगण ने इसमें व्यक्तिपरक अन्तर्दृष्टि से इसका चित्रण किया है, ताकि यह प्रबुद्ध पाठकों की विश्लेषणात्मक अपेक्षाओं को दिशा दे सके। यह रचना उन सभी के लिए उपयोगी है जो समाजशास्त्र के एक नवीन अवधारणात्मक और विवेचनात्मक संसार में प्रवेश करना चाहते हैं। यह पुस्तक समाजशास्त्र के प्रकाशमान स्वरूप को एक नई अर्थवत्ता प्रदान करती है।

विषय-सूची:

  1. समाजशास्त्रीय सिद्धांत के अन्तर्विषयक परिप्रेक्ष्य

  2. घटनाविज्ञानात्मक उपागम

  3. मैक्स शेलर का घटनाविज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य

  4. मैक्स वेबर का घटनाविज्ञानात्मक आयाम

  5. अल्फ्रेड शूट्ज का अन्तर्विषयक संसार

  6. हेरोल्ड गारफिंकेल का लोक विधिविज्ञान

  7. इरविन गॉफमैन का नाट्यशास्त्रीय उपागम

  8. हरबर्ट ब्लूमर का प्रतीकात्मक अन्तर्क्रियावाद

  9. जार्ज हरबर्ट मीड का द्वंद्वात्मक दर्शन

  10. कार्ल मार्क्स का घटनाविज्ञानात्मक परिप्रेक्ष्य


About the Authors

सुचित्रा शर्मा विगत 41 वर्षों से शिक्षण कार्य में संलग्न हैं। उन्होंने कई शोध परियोजनाएं (आईसीएसएसआर और यूजीसी) पूर्ण की हैं तथा 11 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि दिलाई है। 3 पुस्तकों की लेखिका होने के साथ-साथ 6 पुस्तकों में अध्याय लेखन और 60 से अधिक शोध-पत्रों का प्रकाशन किया है। उन्होंने 100+ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध प्रस्तुतिकरण किया है और मूल्य शिक्षा एवं थर्ड जेंडर विषय पर विशेष रूप से व्याख्यान देती हैं। वर्तमान में वह दुर्ग (छ.ग.) के स्वशासी महाविद्यालय में कार्यरत हैं।

अमरनाथ शर्मा दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, रामकृष्ण मिशन, रांची में परियोजना समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 25 शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं और विभिन्न संस्थानों में शिक्षण अनुभव प्राप्त किया है। वर्तमान में वे शासकीय महाविद्यालय, बोरी, दुर्ग (छ.ग.) में कार्यरत हैं।

आभा विरेन्द्र वर्तमान में बी.एस.एस.एम. महाविद्यालय, धनबाद, झारखंड में लेक्चरर के पद पर कार्यरत हैं। उनके चार शोध-पत्र सेमिनारों में वाचित हुए हैं और तीन शोध-पत्र प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके पास 23 वर्षों का परामर्श और शोध परियोजना मार्गदर्शन का अनुभव है।