कमजोर वर्ग का समाजशास्त्र: दलित, जनजाति समाज एवं महिलाएं (kamjor varg ka samajshastra)
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Book Details
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Author: संपादक: विवेक कुमार (Vivek Kumar)
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Binding: Paperback
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Number of Pages: 199
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Release Date: 10-02-2024
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ISBN: 9788131613702
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Languages: Hindi
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Package Dimensions: 9.8 x 5.9 x 3.9 inches
- Publisher: Rawat Publications
About the Book
यह पुस्तक विभिन्न प्रकार की वंचनाओं पर सृजित समुदायों/समूहों के विश्लेषण के समाजशास्त्र का प्रतिनिधित्व करती है। पुस्तक में मुख्यतः दलितों, जनजातियों, महिलाओं एवं दलित महिलाओं से जुड़े सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, संवैधानिक, आदि अनेक तथ्यों का विश्लेषण विविध समाज विज्ञानियों द्वारा अपने-अपने दृष्टिकोण से किया गया है। समाजशास्त्रियों ने एक ओर जहां विभिन्न समूहों/समुदायों की वंचना के आधार को रेखांकित किया है वहीं उनकी वंचना के विखंडन का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से रास्ता भी बताया है। यह पुस्तक चार भागों में विभक्त है:
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अम्बेडकर एवं जाति उन्मूलन
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भारतीय जनजाति समाज
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दलित इतिहास लेखन
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महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार
यह पुस्तक वंचितों के समाजशास्त्र के ढांचे की पूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत करती है। इसमें समाजशास्त्रियों द्वारा विभिन्न सामाजिक समूहों के अधिकारों की रक्षा, उनके सशक्तिकरण और भारत में सामाजिक न्याय की दिशा में उठाए गए कदमों की विस्तृत विवेचना की गई है।
Contents
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कमजोर वर्ग का समाजशास्त्र: एक समाजशास्त्रीय अवलोकन / विवेक कुमार
खण्ड 1: अंबेडकर एवं जाति उन्मूलन
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जाति उन्मूलन/ डॉ भीमराव अम्बेडकर
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बी.आर. अम्बेडकर और राष्ट्र निर्माण अवधारणा / विवेक कुमार
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डॉ भीमराव अम्बेडकर के शिक्षा संबंधी विचारों का मूल्यांकन / मीनाक्षी मीणा
खण्ड 2: भारतीय जनजाति समाज
4. भारतीय जनजातियों के सन्दर्भ में कुछ विचार / विनय कुमार श्रीवास्तव
खण्ड 3: दलित इतिहास लेखन
5. दलित इतिहास लेखन: वैकल्पिक अधीनस्थ समाजशास्त्र की तलाश में - एक समीक्षात्मक मूल्यांकन / अजय कुमार
6. दलित वीरांगना और 1857 का वैकल्पिक इतिहास: भारतीय समाजशास्त्र में एक उपेक्षित तथ्य / चारु गुप्ता
खण्ड 4: महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार
7. दलित महिलाओं के मानव अधिकार हनन: निरंतरता और बदलाव / विनोद आर्य
8. अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता, महिला सशक्तिकरण और मानव अधिकार / अरुण कुमार सिंह
यह पुस्तक सामाजिक न्याय और मानव अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण विचार और दृष्टिकोण प्रदान करती है, विशेष रूप से दलितों, जनजातियों, महिलाओं और विशेषकर दलित महिलाओं के मुद्दों पर।

