👨‍💼 CUSTOMER CARE NO +919667374353

⭐ TOP RATED SELLER ON AMAZON, FLIPKART, EBAY & WALMART

🏆 TRUSTED FOR 10+ YEARS

  • From India to the World — Discover Our Global Stores

🚚 Extra 10% + Free Shipping? Yes, Please!

Shop above ₹5000 and save 10% instantly—on us!

THANKYOU10

Jharkhand kai aadivasiyon ka Itihas [Paperback] Vinod Kumar

Regular price Rs.250.00
Tax included


Genuine Products Guarantee

We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.

Delivery and Shipping

Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.

Author: Vinod Kumar

Brand: Anuugya

Edition: 1

Features:


  • History of Aadivasis of Jharkahad, Literature of Aadivasi, Revolts of Aadivasi, Culture of Aadivasis

  • Language Published: Hindi

Binding: paperback

Number Of Pages: 176

Release Date: 01-12-2019

Part Number: B07MRLG43M

Details: सन् 2005 में मेरी एक किताब ‘आदिवासी संघर्षगाथा’ के नाम से प्रकाशित हुई थी। यह किताब उसी पुस्तक का संशोधित और परिवर्धित रूप है जिसमें आदिवासी राष्ट्रीयता बनाम झारखंड राज्य, धनकटनी आंदोलन, माओवाद का प्रवेश और विस्तार, नव गठित राज्य में आदिवासियों की स्थिति आदि चैप्टर जोड़े गये हैं। पुस्तक को तैयार करने में मुख्य रूप से 1902 से 1910 के बीच छोटानागपुर में चले सर्वे सेटलमेंट आपरेशन की फाईनल रिपोर्ट से मदद ली गई है जिसे तत्कालीन सेटलमेंट अफिसर और इंडियन सिविल सर्विस के अधिकारी जे. रीड ने तैयार किया था। कवर का फोटो मेरे मित्र कुमार चंद्र मार्डी के गोड़ग्राम, पोटका, सिंहभूम, स्थित घर का है जहां 1978 के सितंबर माह की एक दुपहरी मैं पहुंच गया था और कुछ वर्ष रहा था। ‘‘गैर आदिवासी समाज ने आदिवासी क्षेत्र को अपना आंतरिक औपनिवेश बना कर यहां के श्रम और खनिज संपदा का भीषण दोहन और शोषण तो किया ही, अपने ही इलाके में उन्हें अल्पसंख्यक बना दिया। वैसे तो अंग्रेजों के जमाने में ही आदिवासी क्षेत्र में बहिरागतों का बडे पैमाने में प्रवेश हो चुका था और 1901 की जनगणना में आदिवासियों मूलवासियों की आबादी लगभग 46 प्रतिशत रह गयी थी, लेकिन आज उनकी आबादी झारखंड क्षेत्र में महज 26 प्रतिशत रह गयी है और हालत यह कि अब बड़ी बेशर्मी से जनजातीय क्षेत्रों को फिर से गठित करने की मांग होने लगी है.’’

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 1.0 inches

Languages: Hindi