Gramin Samajshastra: Bhartiya Pariprekshya (Rural Sociology: Indian Context)
Gramin Samajshastra: Bhartiya Pariprekshya (Rural Sociology: Indian Context) is backordered and will ship as soon as it is back in stock.
Couldn't load pickup availability
Genuine Products Guarantee
Genuine Products Guarantee
We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.
Delivery and Shipping
Delivery and Shipping
Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.
Book Details
-
Author: प्रकाश चन्द्र जैन (Prakash Chandra Jain)
-
Publisher: Rawat Publications
-
Language: Hindi
-
ISBN: 9788131611708
-
Pages: 358
-
Cover: Paperback
-
Release Date: 27-08-2021
-
Dimensions: 8.5 x 5.5 x 0.6 inches
About the Book
ग्रामीण समाजशास्त्र को समाजशास्त्र की एक प्रमुख शाखा माना जाता है, विशेषकर भारत जैसे देश में जहाँ आज भी लगभग 70 प्रतिशत आबादी गाँवों में निवास करती है। महात्मा गांधी ने कहा था कि यदि भारत को समृद्ध बनाना है तो पहले गाँवों को समृद्ध बनाना होगा। गाँवों की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक संरचना को समझे बिना राष्ट्र की आत्मनिर्भरता संभव नहीं।
यह पुस्तक गाँव और ग्रामीण समाज के प्रमुख आयामों को समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषित करती है। इसमें ग्राम्य जीवन की विविधताओं, एकता, सामाजिक परिवर्तन, वैश्वीकरण व उदारीकरण के प्रभाव, विकास योजनाओं और ग्रामीण समस्याओं का समग्र दृष्टिकोण से अध्ययन किया गया है।
मुख्य विषयवस्तु:
-
ग्रामीण समाजशास्त्र का स्वरूप
-
अध्ययन के उपागम
-
बुनियादी अवधारणाएँ
-
ग्रामीण सामाजिक संरचना
-
ग्रामीण महिलाओं की स्थिति
-
धार्मिक व्यवस्था: स्थानीयकरण, सार्वभौमिकरण, संस्कृतिकरण
-
कृषक संबंध एवं उत्पादन पद्धति
-
कृषक संरचना, भूमि सुधार व हरित क्रांति
-
कृषक असंतोष
-
ग्रामीण समस्याएँ
-
विकास रणनीतियाँ
-
पंचायती राज और सशक्तिकरण
-
वैश्वीकरण का कृषि पर प्रभाव
यह पुस्तक समाजशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं एवं उन सभी पाठकों के लिए उपयोगी है जो ग्रामीण भारत को गहराई से समझना चाहते हैं।
About the Author
प्रकाश चन्द्र जैन, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर में समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने राजस्थान के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया और समाजशास्त्र के विविध विषयों पर शोध कार्य किए। उनके प्रमुख शोध-क्षेत्रों में सामाजिक आंदोलन, ग्रामीण एवं जनजातीय समाज, सामाजिक स्तरीकरण और परिवर्तन सम्मिलित हैं।
उनकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं:
-
Social Movement Among Tribals
-
Planned Development Among Tribals
-
Globalisation and Tribal Economy
-
Social Anthropology
-
Rural Sociology
-
सामाजिक आन्दोलन का समाजशास्त्र
-
भारतीय समाज

