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Dr. Ram Manohar Lohia ka Samajik aur Sanskritik Chintan -- डॉ. राम मनोहर लोहिया का सामाजिक और सांस्कृतिक चिन्तन

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Author: Braj Kumar Pandey -- व्रज कुमार पांडेय

Brand: Anuugya Books

Edition: Ist

Binding: perfect

Number Of Pages: 107

Release Date: 01-12-2022

Details: मार्के की बात है कि जर्मनी से शिक्षा प्राप्त कर लौटने के बाद डॉ. लोहिया ने कुछ समय तक बिड़ला बन्धुओं में से एक रामेश्‍वर दास बिड़ला के निजी सचिव सह-चीनी मिल निरीक्षक के रूप में एक वर्ष तक नौकरी की और मूलत: मारवाड़ी होने के कारण उनकी रिश्तेदारियाँ व्यापारियों के साथ थीं। इनके बावजूद उन्होंने कभी किसी भारतीय सेठ का वित्त-पोषण स्वीकार नहीं किया। इसके विपरीत जय प्रकाश नारायण, अशोक मेहता और मीनू मसानी के बारे में यह बात नहीं कह सकते। जय प्रकाश नारायण पर लिखित नागार्जुन की मैथिली कविता “आज्क महाकारुणिक बुद्ध” (साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत कविता-संग्रह “पत्रहीन नग्‍न गाँछ” में शामिल) को पढ़कर बहुत कुछ जान सकते हैं। इतना ही नहीं ‘सम्पूर्ण क्रान्ति’ के दौरान जयप्रकाश नारायण ने स्वयं ‘एवरीमैन्स वीकली’ में स्वीकार किया कि अमेरिका से शिक्षा प्राप्त कर भारत लौटने के बाद गाँधी जी की सिफारिश पर घनश्याम दास बिड़ला ने उन्हें अपना निजी सचिव बनाया। लगभग एक या दो साल के बाद उन्होंने जब नौकरी छोड़ी, तब से आजीवन बिड़ला जी पूरी तनख्वाह मुद्रास्फीति का ध्यान रखकर देते रहे। इतना ही नहीं, डालमिया-जैन के घोटाले की जाँच के लिए नियुक्त उच्चतम न्यायालय के जज विवियन बोस की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट में जयप्रकाश नारायण की गवाही पर खेदजनक टिप्पणियाँ हैं। मगर लोहिया के ऊपर सेठों का हितैषी होने तथा जातिवाद के दलदल में धँसने का कोई आरोप नहीं लग सकता। ...इसी पुस्तक से...

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi