Bhartiya Gramin Samajshastra (Indian Rural Sociology)
Bhartiya Gramin Samajshastra (Indian Rural Sociology) is backordered and will ship as soon as it is back in stock.
Couldn't load pickup availability
Genuine Products Guarantee
Genuine Products Guarantee
We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.
Delivery and Shipping
Delivery and Shipping
Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.
Book Details:
-
Author: A.R. Desai
-
Publisher: Rawat Publications
-
Language: Hindi
-
Edition: 2009
-
ISBN: 9788170333852
-
Pages: 296
-
Cover: Hardcover
-
Dimensions: 8.7 x 5.8 x 0.8 inches
About the Book (पुस्तक के विषय में):
भारतीय ग्रामीण समाज जटिल सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचनाओं से युक्त है जो अनेक अंतर्विरोधों को अपने भीतर समेटे हुए है। यह पुस्तक उन सामाजिक मिथकों का खंडन करती है, जिनमें ग्रामीण समाज को 'सरल समाज' के रूप में चित्रित किया गया है। डॉ. ए. आर. देसाई द्वारा रचित यह महत्वपूर्ण कृति भारतीय ग्राम्य जीवन के अंतर्विरोधी स्वरूप को द्वंद्वात्मक दृष्टिकोण से विश्लेषित करती है।
ग्रामीण समाज में व्याप्त शोषण, दमन, सामंती संस्कृति, भूमिहीनता, कर्जग्रस्तता और निर्धनता जैसी समस्याओं को गहराई से प्रस्तुत करते हुए, यह पुस्तक गाँवों को केवल एक सामाजिक संरचना नहीं बल्कि वर्ग संघर्ष, सामाजिक असमानता और सामाजिक परिवर्तन की प्रयोगशाला के रूप में दिखाती है। नगरीय क्षेत्रों द्वारा गांवों के शोषण, सीमांत किसानों की स्थिति, ग्रामीण राजनीतिक जीवन, जाति व्यवस्था और धर्म जैसे विषयों का विश्लेषण समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से किया गया है।
यह पुस्तक अनुभवजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और ग्रामीण भारत की यथार्थपरक, वैज्ञानिक समझ विकसित करती है। सरल भाषा में लिखा गया इसका मार्क्सवादी विश्लेषण इसे समाजशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और ग्रामीण भारत को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी बनाता है।
Contents (विषय सूची):
-
भारतवर्ष में ग्रामीण-समाजशास्त्र का अध्ययन
-
भारतवर्ष का समाजशास्त्रीय विश्लेषण
-
ग्रामीण-समाजशास्त्र: उद्भव तथा क्षेत्र
-
ग्रामीण-नगरीय भेद
-
ग्राम और उसका इतिहास
-
ग्रामीण समाज का प्रादेशिक अध्ययन
-
ग्रामीण जनता का आर्थिक जीवन
-
ग्रामीण ऋणग्रस्तता की समस्या
-
ग्रामीण परिवार
-
ग्रामीण भारत में जाति-प्रथा
-
ग्रामीण जनता का राजनीतिक जीवन
-
ग्रामीण धर्म
-
ग्रामीण शिक्षा
-
ग्रामीण संस्कृति
-
परिवर्तनशील ग्रामीण जगत
-
सामुदायिक विकास योजनाएं
-
ग्रामीण पुनर्निर्माण की भूमिका
-
उपसंहार
About the Author (लेखक परिचय):
स्व. डॉ. ए. आर. देसाई भारतीय समाजशास्त्र के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने द्वंद्वात्मक-ऐतिहासिक पद्धति को आधार बनाकर भारतीय समाज के विविध पहलुओं का अध्ययन किया। भारतीय राष्ट्रवाद की सामाजिक पृष्ठभूमि उनकी सर्वाधिक चर्चित कृति रही है, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। उन्होंने Peasant Struggles in India, Urban Family in India, भारत का विकास मार्ग आदि अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की।
बंबई विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और ‘इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी’ के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने समाजशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अपने लेखों, भाषणों और आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक न्याय, मानवाधिकार और वंचित वर्गों की समस्याओं को उजागर किया।


