Bharatiya Samajshastriya Chintan (Indian Sociological Thought) Hindi
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Book Details
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Author: B.K. Nagla
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Publisher: Rawat Publications
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Language: Hindi
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Edition: 2024
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ISBN: 9788131606971
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Pages: 400
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Cover: Hardcover
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Dimensions: 8.6 x 5.8 x 1.1 inches
About the Book
भारतीय समाजशास्त्रियों द्वारा भारतीय समाज के वैज्ञानिक और मानवीय विश्लेषण को समर्पित यह पुस्तक समकालीन भारत को समझने के लिये विविध परिप्रेक्ष्यों की गहराई से पड़ताल करती है। लेखक बी.के. नागला ने इस ग्रंथ में डी.डी. कोसाम्बी, रोमिला थापर, राधाकमल मुकर्जी, जी.एस. घुर्ये, एम.एन. श्रीनिवास, ए.आर. देसाई, बी.आर. अम्बेडकर, रणजीत गुहा, और योगेन्द्र सिंह जैसे प्रतिष्ठित समाजशास्त्रियों के दृष्टिकोणों को समेटा है। इन परिप्रेक्ष्यों में ऐतिहासिक, भारतशास्त्रीय, संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक, मार्क्सवादी, सांस्कृतिक, सभ्यतात्मक और अधीनस्थ समूहों के दृष्टिकोण शामिल हैं।
पुस्तक में यह तर्क दिया गया है कि भारत जैसे बहुलतावादी, तकनीकी, प्रजातांत्रिक और पूंजीवादी समाज को समझने के लिए स्वदेशी दृष्टिकोणों की संरचना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, पुस्तक वैश्वीकरण की चुनौतियों, शिक्षा के निजीकरण, विज्ञान और तकनीक की नीतियों जैसे समसामयिक विमर्शों को भी समाहित करती है।
अंतिम खंड में देशीकरण, संदर्भीकरण और स्वदेशी श्रेणियों के प्रयोग की उपयोगिता पर चर्चा की गई है, जो समाजशास्त्र के विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अकादमिक जगत के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।
लेखक परिचय
बी.के. नागला एक प्रख्यात समाजशास्त्री हैं, जो महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्होंने एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस, नई दिल्ली में भी अध्यापन किया है। सेवानिवृत्ति के बाद वे कोटा मुक्त विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में बाबू जगजीवनराम पीठ के प्रोफेसर रहे। उनके लेख देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं और उन्हें अपराधशास्त्र में उनके योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।

