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Author: Ashok Vajpeyi

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: First Edition

Binding: hardcover

Number Of Pages: 103

Release Date: 01-12-2021

Details: अशोक वाजपेयी का यह तीसरा कविता संग्रह उनकी सृजन-सक्रियता का साक्ष्य है। उनकी कविता ने समकालीन हाहाकार और प्रतिमुखरता के काव्य-परिवेश में अपनी गहरी जीवनासक्ति, शांत सघनता और उत्कट सम्वेदन से ध्यानाकर्षण किया है। अख़बारी इकहरेपन और सरलीकृत यथार्थ के मुक़ाबले उनकी कविता ने अर्थ की अनेकायामिता, भाषा की, हिन्दी काव्य-भाषा की लुप्तप्राय अन्तर्ध्वनियों के पुनराविष्कार, प्रेम-प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा, पुनर्प्रतिष्ठा और जीवन की कोमलताओं के पुनर्कथन का साहस किया है। समकालीन कविता से प्रेम, कामना और सहज को जब लगभग देश निकाला-सा दिया जा चुका है, अशोक वाजपेयी एक बिरले कवि हैं जो प्रेम के लिए जगह की मांग और जैसे उसे हमारे लिए पुनरुपलब्ध कर रहे हैं । भोपाल के भयावह गैस कांड के बाद अपनी बेटी और पृथ्वी पर लिखी कविताओं का एक क्रम, अस्तित्व के अर्थ, नियति और विकल्प पर कुछ चिन्तनधर्मी कविताएँ इस संग्रह को विशिष्ट बनाती हैं। उसमें सचाई के निजी ऐन्द्रिय अधिग्रहण, कथन की उत्कट पारदर्शिता और वैचारिक द्वंद्व का दुर्लभ संयोजन है। क्रूर और हिंस्र होती जाती व्यवस्था में प्रेम और कोमलता का दृढ़ कथन और क्षत-विक्षत होते परिवेश में प्रकृति का विकल विन्यास अशोक वाजपेयी की आवाज़ को आन्तरिकता और विशिष्टता देते हैं–आज के सारे शोरगुल में वह एक ऐसी अलग आवाज़ है जो अनसुनी नहीं रह सकती।

EAN: 9789390971503

Package Dimensions: 8.7 x 5.7 x 0.5 inches

Languages: Hindi