👨‍💼 CUSTOMER CARE NO +919667374353

⭐ TOP RATED SELLER ON AMAZON, FLIPKART, EBAY & WALMART

🏆 TRUSTED FOR 10+ YEARS

  • From India to the World — Discover Our Global Stores

Tulsidas Chandan Ghisain

Regular price Rs.346.00
Tax included


Genuine Products Guarantee

We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.

Delivery and Shipping

Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.

Author: Harishankar Parsai

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: Ninth

Binding: paperback

Number Of Pages: 175

Release Date: 01-01-2015

Part Number: Refer to Sapnet.

Details: हरिशंकर परसाई के लिए व्यंग्य साध्य नहीं, साधन था ! यही बात उनको साधारण व्यंग्यकारों से अलग करती है ! पाठक को हँसाना, उसका मनोरंजन करना उनका मकसद नहीं था ! उनका मकसद उसे बदलना था ! और यह काम समाज-सत्य पर प्रमाणिक पकड़, सच्ची सहानुभूति और स्पष्ट विश्व-दृष्टि के बिना संभव नहीं हो सकता ! खास तौर पर अगर आपका माध्यम व्यंग्य जैसी विधा हो ! हरिशंकर परसाई के यहाँ ये सब खूबियाँ मिलती हैं ! उनकी दृष्टि की तीक्ष्णता और वैचारिक स्पष्टता उनको व्यंग्य-साहित्य का नहीं विचार-साहित्य का पुरोधा बनाती है ! तुलसीदास चन्दन घिसैं के आलेखों का केंद्रीय स्वर मुख्यतः सत्ता और संस्कृति के सम्बन्ध हैं ! इसमें हिंदी साहित्य का समाज और सत्ता प्रतिष्ठानों से उसके संबंधों के समीकरण बार-बार सामने आते हैं ! पाक्षिक 'सारिका' में 84-85 के दौरान लिखे गए इन निबंधों में परसाई जी ने उस दुर्लभ लेखकीय साहस का परिचय दिया है, जो न अपने समकालीनों को नाराज करने से हिचकता है और न अपने पूर्वजों से ठिठोली करने से जिसे कोई चीमड़ नैतिकता रोकती है ! गौरतलब यह कि इन आलेखों को पढ़ते हुए हमें बिलकुल यह नहीं लगता कि इन्हें आज से कोई तीन दशक पहले लिखा गया था ! हम आज भी वैसे ही हैं और आज भी हमें एक परसाई की जरूरत है जो चुटकियों से ही सही पर हमारी खाल को मोटा होने से रोकता रहे !

EAN: 9788171789061

Package Dimensions: 7.2 x 5.0 x 0.6 inches

Languages: Hindi