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TAJMAHAL KA TENDER (PB)

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Author: Ajay Shukla

Brand: Rajkamal Prakashan

Edition: 3

Binding: paperback

Number Of Pages: 80

Release Date: 01-06-2016

Part Number: Refer to Sapnet.

Details: À¤¤à¤¾à¤œà¤®à¤¹à¤² का à¤ÿेंडर' हिंदी का ऐसा मड़लिक नाà¤ÿक है जिसने सफल मंचनों के नए कीर्तिमान गढ़े। संस्कृत, अंग्रेजी और अन्य à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं से अनूदित-रूपांतरित नाà¤ÿकों पर निर्à¤à¤° रहनेवाले हिंदी रंगमंच के पास हिंदी के अपने मड़लिक नाà¤ÿक इतने कम हैं कि उँगलियों पर गिने जा सकते हैं। उनमें à¤à¥€ मंचीयता के गुणों से संपन्न नाà¤ÿक तो और à¤à¥€ कम हैं। ऐसे में ताजमहल का à¤ÿेंडर एक राहत की तरह मंच पर उतरा था और आज वह अनेक नाà¤ÿक-मंडलियों की प्रिय नाà¤ÿ्य-कृतियों में है, दर्शकों को तो $खैर वह à¤à¥à¤²à¤¾à¤ ही नहीं à¤à¥‚लता। देश-विदेश की अनेक à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में इसका अनुवाद और मंचन हो चुका है, और हो रहा है। नाà¤ÿक का आधार यह परिकल्पना है कि मुगल बादशाह शाहजहाँ इतिहास से निकलकर अचानक बीसवीं सदी की दिल्ली में गद्दीनशीन हो जाते हैं, और अपनी बे$गम की याद में ताजमहल बनवाने की इच्छा ज़ाहिर करते हैं। नाà¤ÿक में बादशाह के अलावा बा$की सब आज का है। सारी सरकारी मशीनरी, नड़करशाही, छुà¤ÿà¤à¥ˆà¤¯à¥‡ नेता, किस्म-किस्म के घूसखोर और एक-एक फाइल को बरसों तक दाबे रखनेवाले अलग-अलग आकारों के क्लर्क, छोà¤ÿे-बड़े अफसर, और एक गुप्ता जी जिनकी देख-रेख में यह प्रोजेक्à¤ÿ पूरा होना है। सारे ताम-झाम के साथ सारा अमला लगता है और देखते-देखते पच्चीस साल गुज़र जाते हैं। अधेड़ बादशाह बूढ़े होकर बिस्तर से लग जाते हैं और जिस दिन ताजमहल का à¤ÿेंडर फ्लोà¤ÿ होने जा रहा है, दुनिया को विदा कह जाते हैं। नाà¤ÿक का व्यंग्य हमारे आज के तंत्र पर है। बीच-बीच में जब हम इसे बादशाह की निगाहों से, उनके अपने दड़र की चँचाई से देखते हैं, वह और à¤à¥€ à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ लगता है, और ताबड़तोड़ कहकहों के बीच à¤à¥€ हम उस अवसाद से अछूते नहीं रह पाते जिसे यह नाà¤ÿक रेखांकित करना चाहता है यानी स्वार्थ की व्यक्तिगत दीवालियों के बीच पसरा वह सार्वजनिक अंधकार जिसे आज़ादी के बाद के à¤à¤¾à¤°à¤¤ की नड़करशाही ने रचा है।

EAN: 9788126729159

Package Dimensions: 8.3 x 5.4 x 0.3 inches

Languages: Hindi