स्वच्छता का समाजशास्त्र (Sociology of Sanitation)
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Book Details
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Author/Editor: B.K. Nagla
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Publisher: Rawat Publications
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Language: Hindi
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Edition: 2023
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ISBN: 9788131613023
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Pages: 204
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Cover: Paperback
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Sale Territory: India
About the Book
‘स्वच्छता का समाजशास्त्र’ स्वच्छता और समाज के मध्य अंतर्निहित सम्बन्धों का गहन समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ न केवल स्वच्छता को शारीरिक या भौतिक क्रिया के रूप में देखता है, बल्कि इसे सामाजिक चेतना, असमानता, जातीय संरचना, और नैतिक बोध से जोड़कर प्रस्तुत करता है। भारत के सामाजिक-धार्मिक परिप्रेक्ष्य में महात्मा गांधी, डॉ. अम्बेडकर, संत गाडगे बाबा, सूर्यकान्त पाठक और डॉ. विन्देश्वर पाठक जैसी विभूतियों के कार्यों को रेखांकित करते हुए यह पुस्तक दर्शाती है कि कैसे स्वच्छता आंदोलनों ने सामाजिक परिवर्तन की दिशा तय की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रभाव और उसकी सामाजिक व्याप्ति को भी इस पुस्तक में समाविष्ट किया गया है। पुस्तक के अध्याय समकालीन विचारधारा, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक संस्थाओं की भूमिका और पर्यावरणीय पहलुओं को समेटते हैं, जिससे यह शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और जनसामान्य के लिए एक उपयोगी साहित्य बन जाती है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए उपयोगी है जो स्वच्छता, सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरणीय जागरूकता के अंतर्संबंधों को समझना चाहते हैं।
Contents
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स्वच्छता का समाजशास्त्र: एक परिचयात्मक विमर्श / बी.के. नागला
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प्रोफेसर डॉ. विन्देश्वर पाठक: एक परिचय / बी.के. नागला
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स्वच्छता एवं पर्यावरण / महात्मा गांधी
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पूर्व-आधुनिक युग में अस्पृश्यता एवं स्वच्छता / हेतुकर झा
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भारत में स्वच्छता आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि / अनिल वाघेला
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आधुनिक भारत में धार्मिकता एवं स्वच्छता / आशीष सक्सेना एवं विजयलक्ष्मी सक्सेना
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स्वच्छता और सामाजिक संस्थाएं / रिचर्ड पाइस
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स्वच्छता, स्वास्थ्य और समाज / बी.के. नागला
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स्वच्छता और पर्यावरण / अनिल वाघेला
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भारत में स्वच्छता कार्यक्रम / मोहम्मद अकरम
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स्वच्छता का समाजशास्त्र: विन्देश्वर पाठक के साथ साक्षात्कार / बी.के. नागला एवं आशीष कुमार
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स्वच्छता एवं समाज: एक आलोचनात्मक दृष्टि / राजीव गुप्ता एवं एस.सी. चौहान
About the Author
बी.के. नागला, विख्यात समाजशास्त्री, महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रोफेसर रहे हैं। आपने बड़ौदा, नई दिल्ली, कोटा और बनारस के विश्वविद्यालयों में भी शिक्षा दी है। आपके शोध पत्र देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं और समाजशास्त्र एवं अपराधशास्त्र में विशेष योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं। आपकी लेखनी समाज में बदलाव की दिशा में प्रेरणास्रोत रही है।

