समाजशास्त्रिय विचारक: प्रमुख पाश्चात्य विचारक (Social Thinkers) समाजशास्त्र रीडर - II (Hindi)
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Book Details
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Author: नरेश भार्गव, वेददान सुधीर, अरुण चतुर्वेदी और संजय लोढ़ा (Naresh Bhargava, Veddan Sudhir, Arun Chaturvedi and Sanjay Lodha)
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Publisher: Rawat Publications
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Language: Hindi
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Edition: 2021
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ISBN: 9788131610442
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Pages: 212
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Cover: Hardcover
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Release Date: 12-08-2021
About the Book
समाजशास्त्र को एक सैद्धांतिक विषय के रूप में प्रतिष्ठित करने में अनेक चिंतकों का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने समाज की संरचना, विकास और परिवर्तन को समझने की नवीन पद्धतियाँ और अवधारणाएँ प्रस्तुत कीं। यह पुस्तक समाजशास्त्र के उन सात प्रमुख विचारकों — ऑगस्ट काम्टे, कार्ल मार्क्स, मैक्स वेबर, इमाइल दुर्खीम, विल्फ्रेडो परेटो, हर्बर्ट स्पेन्सर और पितरिम सोरोकिन — के योगदान को समर्पित है, जिन्होंने समाजशास्त्र को न केवल गहराई प्रदान की बल्कि इसकी नींव को भी मज़बूती दी।
पुस्तक में इन विचारकों की प्रमुख अवधारणाओं, उनके द्वारा प्रस्तुत सिद्धांतों और पद्धतियों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इस संकलन के माध्यम से पाठक यह जान सकते हैं कि कैसे इन दार्शनिकों और समाजशास्त्रियों ने अपने समय की सामाजिक चुनौतियों का विश्लेषण किया और भविष्य के समाजशास्त्र की नींव रखी। यह पुस्तक विशेष रूप से समाजशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और इस विषय में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
Contents:
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ऑगस्ट काम्टे
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कार्ल मार्क्स
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मैक्स वेबर
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इमाइल दुर्खीम
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विल्फ्रेडो परेटो
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हर्बर्ट स्पेन्सर
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पितरिम सोरोकिन
About the Editors:
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नरेश भार्गव: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में तीन दशकों से अधिक का अनुभव। सामाजिक आन्दोलन, जाति व्यवस्था, नागर समाज आदि पर विशेष शोध। वर्तमान में जनबोध संस्थान, उदयपुर के अध्यक्ष।
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वेददान सुधीर: विद्या भवन रूरल इंस्टिट्यूट, उदयपुर में पूर्व प्राध्यापक। भारत के संविधान और राजनीति पर शोध। 'मूल प्रश्न' पत्रिका के संस्थापक संपादक। वर्तमान में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के 'अनुवाद पहल' से जुड़े हैं।
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अरुण चतुर्वेदी: राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक और पूर्व अधिष्ठाता। भारतीय विदेश नीति, अंतर्राष्ट्रीय कानून व राजनीतिक चिंतन पर शोध।
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संजय लोढ़ा: राजनीति विज्ञान में प्राध्यापक और दो दशकों से लोकनीति नेटवर्क से जुड़े। लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, मतदान अध्ययन और अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध पर विशेष रुचि।
यह संकलन समाजशास्त्र के क्लासिक चिंतकों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है जो शिक्षण, अध्ययन और शोध—तीनों के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगा।

