ग्रामीण समाजशास्त्र: भारतीय परिप्रेक्ष्य (Rural Sociology: Indian Context) HIndi
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Book Details
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Author: प्रकाश चन्द्र जैन (Prakash Chandra Jain)
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Publisher: Rawat Publications
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Language: Hindi
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ISBN: 9788131611692
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Pages: 358
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Cover: Hardcover
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Release Date: 30-08-2021
About the Book
ग्रामीण समाजशास्त्र को समाजशास्त्र की एक प्रमुख शाखा के रूप में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है, विशेषकर भारत जैसे देश में जहाँ आज भी लगभग 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। महात्मा गांधी ने भी बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की प्रगति गाँवों की प्रगति से ही संभव है। प्रस्तुत पुस्तक इसी विचारधारा को आधार बनाकर गाँवों की सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनीतिक संरचना को गहराई से विश्लेषित करती है।
यह पुस्तक ग्रामीण जीवन की जटिलताओं, उसकी विविधताओं तथा एकता को उजागर करती है। इसमें ग्रामीण महिलाओं की स्थिति, कृषक संरचना, भूमि सुधार, हरित क्रांति, पंचायती राज, वैश्वीकरण के प्रभाव और ग्रामीण विकास की रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को समाहित किया गया है। इसके अतिरिक्त पुस्तक में स्थानीयकरण, सार्वभौमिकरण, संस्कृतिकरण जैसी अवधारणाओं के माध्यम से ग्रामीण धार्मिक व्यवस्था पर भी गहन प्रकाश डाला गया है।
यह पुस्तक न केवल नीति-निर्माताओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी है, बल्कि उन पाठकों के लिए भी बेहद लाभकारी है जो भारतीय गाँवों की संरचना और वहाँ हो रहे सामाजिक परिवर्तन को समझना चाहते हैं।
लेखक परिचय
प्रकाश चन्द्र जैन, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में अध्यापन किया और समाजशास्त्र के अनेक आयामों पर शोध कार्य किया। उनके अनुसंधान क्षेत्रों में सामाजिक आंदोलन, ग्रामीण एवं जनजातीय समाज, सामाजिक स्तरीकरण तथा परिवर्तन शामिल हैं। वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), ICSSR, एवं अन्य संस्थानों द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं में भी संलग्न रहे हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में Social Movement Among Tribals, Planned Development Among Tribals, Globalisation and Tribal Economy, Social Anthropology, Rural Sociology आदि उल्लेखनीय हैं।

