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Book Details

  • Author: जे.पी. सिंह

  • Publisher: Rawat Publications

  • Language: Hindi

  • Edition: First Edition

  • ISBN: 9788131612064

  • Pages: 556

  • Cover: Paperback

  • Release Date: 08-09-2021

  • Dimensions: 9.5 x 6.2 x 1.0 inches


About the Book

यह पुस्तक पाश्चात्य सामाजिक चिन्तनधारा को केंद्र में रखते हुए समाजशास्त्रीय विचारों का एक व्यापक, प्रामाणिक और सरल प्रस्तुतीकरण करती है। जे.पी. सिंह द्वारा लिखित यह ग्रंथ अँगरेजी की नवीनतम और उच्च स्तरीय पुस्तकों पर आधारित है, जिसमें विभिन्न समाजशास्त्रीय अवधारणाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें समाजशास्त्र की कठिन-से-कठिन अवधारणाओं को भी इस तरह सरल भाषा में समझाया गया है कि वह हर स्तर के पाठक को सहज रूप से ग्रहणीय हो।

लेखक ने समाजविज्ञान की अवधारणाओं का न केवल प्रमाणिक हिंदी अनुवाद प्रस्तुत किया है, बल्कि पाश्चात्य समाजशास्त्रियों के नामों के उच्चारण को भी सही रूप में देने का प्रयास किया है। यह पुस्तक हिंदी माध्यम के पाठकों को समाजशास्त्र की गहराइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे वे अँगरेजी माध्यम के विद्यार्थियों की तुलना में किसी भी प्रकार से पीछे न रहें।

पुस्तक में क्लासिकल और आधुनिक समाजशास्त्रियों जैसे ऑगस्त कौंत, कार्ल मार्क्स, मैक्स वेबर, एमिल डर्कहाइम, जॉर्ज हर्बर्ट मीड, टलकॉट पारसन्स, रॉबर्ट के. मर्टन, बी. मालिनॉवस्की आदि के योगदान को समाहित किया गया है। यह ग्रंथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों, शोधार्थियों, और समाजशास्त्र के अध्यापकों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

जे.पी. सिंह एक प्रतिष्ठित समाजशास्त्री और शिक्षाविद हैं, जिन्होंने पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, बिहार सरकार में निदेशक (उच्च शिक्षा) और प्रो-वाइस चांसलर के रूप में कार्य किया है। उन्होंने समाजशास्त्र पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की है और पाठ्यपुस्तक लेखन में उनकी विशेष पहचान है। यह पुस्तक उनके शैक्षणिक अनुभव और विद्वत्तापूर्ण दृष्टिकोण की सजीव झलक प्रस्तुत करती है।