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Kavya Bhasha aur Bhasha ki Bhoomika [Paperback] Arun Prakash Mishra

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Author: Arun Prakash Mishra

Brand: Anuugya Books

Edition: 1

Features:

  • भाषा की उत्पत्ति और विकास
  • भाषा और समाज
  • काव्यभाषा और भाषा की भूमिका
  • डॉ. देवेन्द्रनाथ शर्मा, भूतपूर्व
  • डॉ. हरबंसलाल शर्मा, भूतपूर्व कुलपति

Binding: paperback

Number Of Pages: 200

Release Date: 01-12-2017

Part Number: B07DDDX197

Details: एक सूचनात्मक विवरणात्मक प्रधान चरित्र होने के कारण, काव्यभाषा पर उपलब्ध लगभग सारी सामग्री का समाहार-संकलन और इसके सभी पक्षों को उजागर करने के साथ-साथ भाषा की भूमिका पर भी प्रकाश डालने इस पुस्तक का लक्ष्य है। इस पुस्तक में अँग्रेजी की पुस्तकों का अधिकांश रूप से अनुवाद-सा किया गया है। साथ ही भारतीय आचार्यों की मान्यताओं का भी सम्मिश्रण किया गया है। कुछ मौलिक बातें भी कही गई हैं, जो की इस पुस्तक का लक्ष्य नहीं रहा है। सामान्य और साधारण पाठकों को विषय की पूर्ण जानकारी मिले, यही ध्येय मुख्य है। इस विषय पर कहने की बहुत गुँजाइश है। काव्यभाषा और भाषा की भूमिका के ऊपर एक स्वतन्त्र आलोचनात्मक पुस्तक की पूरी सम्भावना है, जिसमें यह पुस्तक एक सन्दर्भ-ग्रन्थ की भूमिका निर्वाह कर सकती है। – डॉ. अरुण प्रकाश मिश्र भाषा वैज्ञानिक रूढ़ और प्रचलित पद्धतियों से हटकर भाषा और समाज के अन्त:सम्बन्धों को समझने का प्रयास यहाँ नितान्त नवीन, मौलिक और प्रशंसनीय है। भाषा और समाज की सही समझ दोनों के पारस्परिक सम्बन्धों के अनुशीलन से ही सम्भव है। – डॉ. देवेन्द्रनाथ शर्मा, भूतपूर्व कुलपति हिन्दी आलोचना और शोध के क्षेत्र में भाषा और समाज के सम्बन्धों के भाषा-वैज्ञानिक संकीर्णताओं से मुक्त अध्ययन की सम्भावना की दृष्टि से यह पुस्तक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इस तरह का अध्ययन अनेक अनुशासनों के आलोक में सम्भव है किन्तु यहाँ प्रमुखत: द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद की मर्यादायें स्वीकार की गई हैं, जिनके तहत सामाजिक व्यवस्था के वैशिष्ट्य के सन्दर्भ में भाषा की उत्पत्ति और विकास की प्रस्तुति है। प्रचलित मतों के परीक्षणोपरान्त निकाले गए निष्कर्ष इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हैं कि उन पर विवाद सम्भव है। – डॉ. हरबंसलाल शर्मा, भूतपूर्व कुलपति

Package Dimensions: 9.0 x 6.0 x 0.5 inches

Languages: Hindi