👨‍💼 CUSTOMER CARE NO +919667374353

⭐ TOP RATED SELLER ON AMAZON, FLIPKART, EBAY & WALMART

🏆 TRUSTED FOR 10+ YEARS

  • From India to the World — Discover Our Global Stores

भारतीय सामाजिक व्यवस्था (समाजशास्त्र रीडर - IV) Indian Social System (Hindi)

Sale price Rs.842.00 Regular price Rs.1,295.00
Tax included


Genuine Products Guarantee

We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.

Delivery and Shipping

Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.

Book Details

  • Author: नरेश भार्गव, वेददान सुधीर, अरुण चतुर्वेदी और संजय लोढ़ा (Naresh Bhargava, Veddan Sudhir, Arun Chaturvedi and Sanjay Lodha)

  • Publisher: Rawat Publications

  • Language: Hindi

  • Edition: 2021

  • ISBN: 9788131611760

  • Cover: Hardcover

  • Release Date: 12-08-2021


About the Book

भारतीय समाज निरंतर परिवर्तनशील है—समय, परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार उसका स्वरूप बदलता रहा है। सामाजिक परिवर्तन की यह अवधारणा इस विश्वास पर आधारित है कि कोई भी सामाजिक व्यवस्था स्थायी नहीं होती; वह अनेक कारकों से प्रभावित होकर नए रूप लेती रहती है। इस परिवर्तन के आयामों को समझने के लिए कई समाजशास्त्रियों और विचारकों ने आधुनिकता, संस्कृतीकरण, पश्चिमीकरण, लौकिकीकरण और धर्मनिरपेक्षता जैसी अवधारणाओं को प्रस्तुत किया है, जो जाति, वर्ग, परंपराओं, मान्यताओं और विश्वासों में हो रहे बदलावों की व्याख्या करती हैं।

इस पुस्तक में भारतीय समाज के विविध पक्षों का व्यापक और विचारपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें गैर-बराबरी, जाति, वर्ग, पिछड़े वर्ग, दलित, आदिवासी और अधीनस्थ समूहों की संरचनाओं को विश्लेषित किया गया है। आदिवासी समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली और उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक चुनौतियों को भी गहराई से समझने की कोशिश की गई है।

पुस्तक में शामिल 20 अध्यायों में प्रमुख समाजशास्त्रियों जैसे राम आहूजा, एन.के. सिंघी, योगेन्द्र सिंह, एम.एन. श्रीनिवास, दीपांकर गुप्ता, सुरिंदर एस. जोधका और अन्य विद्वानों के लेख शामिल हैं। ये लेख सामाजिक परिवर्तन, जनसंचार, सामाजिक स्तरीकरण, जातिगत राजनीति, आदिवासी संगठन और भारतीय समाज में उत्पन्न हो रही नई प्रवृत्तियों को समग्र दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं।

यह संकलन न केवल समाजशास्त्र के छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए उपयोगी है, बल्कि उन सभी पाठकों के लिए भी आवश्यक है जो भारतीय समाज के गहन और बदलते स्वरूप को समझने में रुचि रखते हैं।


About the Editors
नरेश भार्गव मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में तीन दशकों तक समाजशास्त्र विभाग में कार्यरत रहे हैं। सामाजिक आंदोलन, नागर समाज और राजस्थान की सामाजिक व्यवस्था इनके शोध के प्रमुख क्षेत्र हैं।
वेददान सुधीर विद्या भवन रूरल इंस्टिट्यूट, उदयपुर में पूर्व राजनीतिक विज्ञान प्राध्यापक रहे हैं और वर्तमान में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के ‘अनुवाद पहल’ से जुड़े हैं।
अरुण चतुर्वेदी राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक एवं पूर्व अधिष्ठाता रहे हैं, जिनका शोध भारतीय विदेश नीति और राजनीतिक चिंतन पर केंद्रित रहा है।
संजय लोढ़ा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और राजस्थान की राजनीति पर केंद्रित लेखक हैं तथा लोकनीति नेटवर्क से लंबे समय से जुड़े हैं।