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Book Details

  • Publisher: Vani Prakashan

  • Author: Dr. Chandrakant Bandivadekar

  • Language: Hindi

  • ISBN: 9788170552161

  • Cover: Hardcover


About the Book

हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में डॉ. चन्द्रकान्त बांदिवडेकर एक सशक्त और गंभीर नाम हैं। वे मानते हैं कि समीक्षा का उद्देश्य किसी रचना की कमज़ोरियों को गिनाना नहीं, बल्कि उसके सौन्दर्य और मर्म को उद्घाटित करना होना चाहिए। इसी दृष्टि से उन्होंने साहित्यिक कृतियों के मूल्यांकन में हमेशा रचना को प्रधानता दी और व्यक्तिगत आग्रहों से स्वयं को दूर रखा।

इस पुस्तक का सम्पादन करते समय डॉ. बांदिवडेकर की प्रेरणा रही कि गोविन्द मिश्र जैसे महत्त्वपूर्ण साहित्यकार के सम्पूर्ण रचना-संसार को आलोचनात्मक परिधि में लाया जाए। इसमें उनके नवीनतम कथासंग्रह से लेकर उपन्यास फूल... इमारतें और बन्दर तक को समाहित किया गया है।

संग्रह में हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकारों जैसे शैलेश मटियानी, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, डॉ. विवेकी राय, डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय, राजी सेठ, निर्मल वर्मा, डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव, डॉ. पुष्पपाल सिंह आदि के आलेख शामिल हैं। साथ ही जैनेन्द्र कुमार, अज्ञेय, भवानी प्रसाद मिश्र, अमृतलाल नागर, अमृत राय, धर्मवीर भारती, गिरिराज किशोर, विद्यानिवास मिश्र, नरेश मेहता जैसे मूर्धन्य साहित्यकारों की पत्र प्रतिक्रियाएँ और पाठकों की टिप्पणियाँ भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं।

इस प्रकार यह ग्रंथ केवल आलोचना नहीं, बल्कि गोविन्द मिश्र के सम्पूर्ण साहित्यिक व्यक्तित्व और उनके सृजन संसार का व्यापक दस्तावेज़ प्रस्तुत करता है।


Author Details

डॉ. चन्द्रकान्त बांदिवडेकर

  • जन्म: 5 नवम्बर 1932, रत्नागिरी (महाराष्ट्र)

  • शिक्षा: एम.ए., पीएच.डी. (बम्बई विश्वविद्यालय)

  • प्रमुख कृतियाँ:

    • हिन्दी और मराठी के सामाजिक उपन्यासों का तुलनात्मक अध्ययन

    • अज्ञेय की कविता: एक मूल्यांकन

    • उपन्यास: स्थिति और गति

    • कविता की तलाश (केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय से पुरस्कृत)

    • जैनेन्द्रजी के उपन्यास: मर्म की तलाश

    • आधुनिक हिन्दी उपन्यास: सृजन और आलोचना

    • मराठी कादम्बरी: चिन्तन आणि समीक्षा (महाराष्ट्र सरकार एवं साहित्य परिषद् से पुरस्कृत)

    • प्रेमचन्द्र: व्यक्ती आणि वाङ्मय (मराठी)

    • मराठी कादंबरीचा इतिहास (मराठी)

डॉ. बांदिवडेकर का लेखन हिन्दी और मराठी आलोचना की परंपरा में एक सेतु की तरह है, जो दोनों भाषाओं की साहित्यिक संवेदनाओं को जोड़ता है।