Dalit Veerangnayen Evam Mukti Ki Chah
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Author: Badri Narayan
Brand: Rajkamal Prakashan
Edition: First Edition
Binding: paperback
Number Of Pages: 188
Release Date: 01-07-2019
Part Number: 812672692X
Details: भारत में सांस्कृतिक अभ्युदय की गवेषणा करने वाली यह पुस्तक उत्तर भारत में दलित-राजनीति के पन का अवलोकन करती है और बताती है कि 1857 की विद्रोही दलित वीरांगनाएँ, उत्तर प्रदेश में दलित-स्वाभिमान की प्रतीक कैसे बनीं और उनका उपयोग बहुजन समाजवादी पार्टी की नेत्री मायावती की छवि निखारने के लिए कैसे किया गया ! यह प[उसतक रेखांकित करती है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दलितों की भूमिका से सम्बंधित मिथकों और स्मृतियों का उपयोग इधर राजनितिक गोलबंदी के लिए किस तरह किया जा रहा है ! इसमें वे कहानियां भी निहित हैं जो दलितों के बीच तृणमूल स्तर पर राजनितिक जागरूकता फ़ैलाने के लिए कही जा रही हैं ! व्यपार-शोध और अन्वेषण पर आधारित इस पुस्तक में इस बात का भी उल्लेख है कि किस तरह लोगों के बीच प्रचलित किस्सों को अपने मनमुताबिक मौखिक रूप से या पम्फलेट के रूप में फिर से रखा जा रहा है और किस प्रकार अपने राजनितिक हित-साधन के लिए प्रत्येक जाती के देवताओं, वीरों एवं अन्य सांस्कृतिक उपादानों को दिखाकर प्रतिमाओं, कैलेंडरों, पोस्टरों और स्मारकों के रूप में तब्दील कर दिया गा है ! इस पुस्तक में यह भी दर्शाया गया है कि कैसे बी.एस. पी. अपना जनाधार बढाने के लिए ऐतिहासिक सामग्रियों का निर्माण एवं पुनर्निर्माण करती है ! यह पुस्तक जमीनी सच्चाइयों एवं परोक्ष जानकारियों पर आधारित है, जिसमें लेखक राजनितिक गोलबंदी के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संसाधनों के इस्तेमाल का विरोध करता है !.
EAN: 9788126726929
Package Dimensions: 8.4 x 5.9 x 0.7 inches
Languages: Hindi

