Bhartiya Samajik Vyavasta (Samajshastra Reader-IV)
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Book Details
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Author: नरेश भार्गव, वेददान सुधीर, अरुण चतुर्वेदी और संजय लोढ़ा (Naresh Bhargava, Veddan Sudhir, Arun Chaturvedi and Sanjay Lodha)
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Language: Hindi
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ISBN: 9788131611777
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Number of Pages: 428
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Binding: Rawat Publications
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Release Date: 12-08-2021
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Package Dimensions: 1.6 x 1.2 x 1.2 inches
About the Book
भारतीय समाज का स्वरूप समय, परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार सतत परिवर्तनशील रहा है। यह पुस्तक सामाजिक परिवर्तन की उस प्रक्रिया को समझने का एक सशक्त माध्यम है, जो यह दर्शाती है कि समाज की कोई भी अवस्था स्थायी नहीं होती और सभी व्यवस्थाएँ परिवर्तनीय होती हैं। इसमें यह विस्तार से समझाया गया है कि सामाजिक संरचनाओं को बदलने में विभिन्न कारक किस प्रकार योगदान करते हैं।
पुस्तक में आधुनिकता, संस्कृतीकरण, पश्चिमीकरण, लौकिकीकरण और धर्मनिरपेक्षता जैसी प्रमुख अवधारणाओं के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की गहराइयों को उजागर किया गया है। जाति, वर्ग, धर्म, परंपराएं और विश्वासों में हो रहे बदलावों को इन सिद्धांतों की सहायता से अच्छी तरह समझा जा सकता है। इसके साथ ही, भारतीय समाज में व्याप्त गैर-बराबरी और सामाजिक विषमताओं के स्वरूप तथा प्रभावों की विश्लेषणात्मक प्रस्तुति भी इस पुस्तक की विशेषता है।
आदिवासी समाज की विशेष जीवनशैली और उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति को केंद्र में रखते हुए, यह संकलन भारतीय समाज में उनकी महत्ता को दर्शाता है। अनुसूचित जनजातियों की विशिष्टताओं और समस्याओं का समावेश पुस्तक को एक समग्र सामाजिक संदर्भ प्रदान करता है।
इस संग्रह में 20 विद्वान लेखकों द्वारा प्रस्तुत लेख शामिल हैं, जिनमें राम आहूजा, एन.के. सिंघी, योगेन्द्र सिंह, एम.एन. श्रीनिवास, दीपांकर गुप्ता, सुरिंदर एस. जोधका और वैरियर एल्विन जैसे प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों के विचार सम्मिलित हैं। ये लेख सामाजिक परिवर्तन, संचार के साधन, सामाजिक स्तरीकरण, जातिगत राजनीति, वर्ग संरचना और आदिवासी समाज पर आधारित हैं।
यह पुस्तक समाजशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों के लिए अत्यंत उपयोगी है, साथ ही उन सभी पाठकों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो भारतीय समाज के बदलते ढांचे को समझने में रुचि रखते हैं।
About the Editors
नरेश भार्गव — मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में तीन दशकों से अधिक का अनुभव। सामाजिक आंदोलन, नागर समाज और राजस्थान की सामाजिक व्यवस्था आपके प्रमुख शोध क्षेत्र हैं। वर्तमान में जनबोध संस्थान, उदयपुर के अध्यक्ष हैं।
वेददान सुधीर — विद्या भवन रूरल इंस्टिट्यूट, उदयपुर में पूर्व राजनीतिक विज्ञान प्राध्यापक। भारत के संविधान और राजनीतिक व्यवस्था पर शोधकर्ता एवं ‘मूल प्रश्न’ पत्रिका के संस्थापक संपादक। वर्तमान में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के ‘अनुवाद पहल’ कार्यक्रम से जुड़े हैं।
अरुण चतुर्वेदी — राजस्थान सरकार, विक्रम विश्वविद्यालय और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में प्राध्यापक। भारतीय विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय कानून और राजनीतिक चिंतन उनके शोध विषय हैं। वर्तमान में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के ‘अनुवाद पहल’ कार्यक्रम में सक्रिय हैं।
संजय लोढ़ा — कॉलेज शिक्षा निदेशालय (राजस्थान सरकार) व मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में प्राध्यापक। लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और मतदान अध्ययन उनके प्रमुख शोध क्षेत्र हैं। आप लोकनीति नेटवर्क से दो दशकों से जुड़े हुए हैं और अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के ‘अनुवाद पहल’ कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

