Bhartiya Samajik Sanrachana Avam Parivartan (Indian Social Structure & Change)
Bhartiya Samajik Sanrachana Avam Parivartan (Indian Social Structure & Change) is backordered and will ship as soon as it is back in stock.
Couldn't load pickup availability
Genuine Products Guarantee
Genuine Products Guarantee
We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.
Delivery and Shipping
Delivery and Shipping
Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.
📚 Book Details
-
Author: K.L. Sharma
-
Publisher: Rawat Publications
-
Language: Hindi
-
Edition: 2006
-
ISBN: 9788131600016
-
Pages: 320
-
Cover: Hardcover
-
Dimensions: 8.8 x 5.8 x 0.9 inches
📝 About the Book
भारतीय समाज एक बहुस्तरीय और विविधताओं से परिपूर्ण संरचना है, जिसमें जातीय, धार्मिक, भाषायी और क्षेत्रीय समूहों की समृद्ध उपस्थिति है। प्रत्येक समूह अपने विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास के साथ इस समाज की जटिलता को और गहराई प्रदान करता है। के.एल. शर्मा द्वारा रचित यह पुस्तक भारतीय सामाजिक संरचना एवं परिवर्तन इस जटिल समाज की परतों को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करती है।
इस पुस्तक में भारतीय समाज के विकास, सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों, जनजातीय जीवन, ग्रामीण एवं नगरीय समुदायों, जाति व्यवस्था, स्त्रियों की सामाजिक स्थिति और सामाजिक विचलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाएं, कारक और राष्ट्रीय एकीकरण पर भी विश्लेषण किया गया है, जिससे यह पुस्तक सामाजिक विज्ञान के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए एक मूल्यवान स्रोत बन जाती है।
लेखक ने ऐतिहासिक और समकालीन संदर्भों में सामाजिक संरचना और सामाजिक परिवर्तन को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। यह पुस्तक न केवल ज्ञानवर्धक है बल्कि समाज के विविध पहलुओं को समझने में भी सहायक सिद्ध होती है।
🧑🎓 About the Author
कन्हैया लाल शर्मा राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व कुलपति और जेएनयू, नई दिल्ली के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स में समाजशास्त्र के प्रोफेसर रह चुके हैं। आपने सामाजिक स्तरीकरण, सामाजिक गतिशीलता, कृषक और जनजातीय आंदोलनों जैसे विषयों पर व्यापक लेखन कार्य किया है। वर्तमान में आप कॉलेज द फ्रांस में अतिथि प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

