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Bhartiya Samaj (Samajshastra Reader-Iii)

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📚 Book Details

  • Author: नरेश भार्गव, वेददान सुधीर, अरुण चतुर्वेदी और संजय लोढ़ा (Naresh Bhargava, Veddan Sudhir, Arun Chaturvedi and Sanjay Lodha)

  • Language: Hindi

  • Binding: Paperback

  • Number of Pages: 372

  • Release Date: 12 August 2021

  • ISBN: 9788131611753

  • Dimensions: 2.0 x 2.0 x 1.6 inches

  • Publisher: Rawat Publications

📝 About the Book

भारत जैसे विविधता से परिपूर्ण देश में सामाजिक संरचना और संस्कृति का अनोखा मेल देखने को मिलता है। यह पुस्तक ‘भारतीय समाज’ उसी सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को समझने का एक सशक्त माध्यम है। शताब्दियों से विभिन्न नस्लीय समूहों और जातीयताओं ने भारत भूमि पर आकर न केवल निवास किया, बल्कि यहां की सामाजिक रचना में गहराई से जुड़ गए। यही कारण है कि भारतीय समाज की पहचान उसकी बहुलता, एकता और सामाजिक संस्थाओं की जटिलता में निहित है।

यह संकलन भारतीय समाज के उन विविध पहलुओं को उजागर करता है, जो हमारे सामाजिक ढांचे को दिशा देते हैं—चाहे वह परिवार हो, विवाह, नातेदारी, ग्रामीण व्यवस्था, नगरीकरण या सामाजिक संस्थाएं। पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि विविध विश्वासों और सांस्कृतिक अंतर के बावजूद भारतीय समाज को जोड़ने वाले सूत्र किस प्रकार काम करते हैं। यह संकलन तीन खंडों में विभाजित है और इसमें कुल 18 अध्याय हैं, जो भारत की सामाजिक संरचना को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं।

पुस्तक का उद्देश्य पाठकों, शोधकर्ताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भारतीय समाज की बहुआयामी संरचना की गहराई से समझ प्रदान करना है। इसमें के.एल. शर्मा, ए.आर. देसाई, श्यामाचरण दुबे, रामधारी सिंह दिनकर, के.एम. कापड़िया और राम आहूजा जैसे प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों और विचारकों के लेख सम्मिलित हैं, जो इस पुस्तक को और भी प्रामाणिक व विचारोत्तेजक बनाते हैं।

यह पुस्तक सामाजिक संस्थाओं, परिवर्तन की प्रक्रियाओं, ग्रामीण-नगरीय द्वैत और भारत में सामाजिक आंदोलनों को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है, जो समाजशास्त्र के छात्रों और अध्येताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।