BHARTIYA SAMAJ KI GATISHEELATA
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पुस्तक विवरण:
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लेखक: आशीष कुमार
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प्रकाशक: Rawat Publications
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भाषा: हिंदी
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संस्करण: 2024
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ISBN: 9788131613979
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पृष्ठ: 249
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कवर: हार्डकवर
पुस्तक के बारे में
भारतीय समाजशास्त्र की नवीन गतिशीलताओं को समझने के लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसमें ‘भारतीय समाजशास्त्र समीक्षा’ में पिछले एक दशक में प्रकाशित प्रमुख समाजशास्त्रीय लेखों का संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जो आधुनिक भारत की सामाजिक संरचनाओं और प्रक्रियाओं के परस्पर प्रभाव को उजागर करते हैं।
पुस्तक दो मुख्य खंडों में विभाजित है—पहला खंड भारतीय समाज की पुनर्दृष्टियों पर केंद्रित है, जिसमें विवेकानंद की समाज की परिकल्पना, 1857 का सामाजिक विश्लेषण, गोवा मुक्ति संग्राम की ऐतिहासिक अंतर्कथाएँ, और ग्रामीण सतत विकास जैसे विषय शामिल हैं। दूसरा खंड समाज में हो रहे विविध परिवर्तनशील आयामों पर केंद्रित है जैसे—मनरेगा और समावेशी विकास, ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियाँ, लोकगीतों का समाजशास्त्रीय विश्लेषण, स्त्रीवादी दृष्टिकोण से कन्याधन, भूमंडलीकरण, गैर-किसानीकरण, किसान आंदोलन, और शहरीकरण की दिशा में नई सोच।
यह पुस्तक विशेष रूप से हिंदी माध्यम के छात्रों, शोधार्थियों, शिक्षकों और समाजशास्त्र के पेशेवरों के लिए तैयार की गई है, ताकि उन्हें भारत की सामाजिक वास्तविकताओं का गहन और समकालीन विश्लेषण सुलभ हो सके।
लेखक के बारे में
आशीष कुमार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सामाजिक प्रणाली अध्ययन केंद्र में सहायक प्राध्यापक हैं। वे हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत के बाद से ही समाजशास्त्र विषय से गहराई से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 'भारतीय समाजशास्त्र समीक्षा' पत्रिका के उप-संपादक के रूप में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में इनके लेखन और संपादन कार्य ने समाजशास्त्र की गुणवत्ता सामग्री को व्यापक पाठकों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

