Bhartiya Samaj (Indian Society)
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Book Details:
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Author: Ram Ahuja
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Publisher: Rawat Publications
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Language: Hindi
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Edition: 2000
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ISBN: 9788170336396
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Pages: 488
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Cover: Hardcover
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Dimensions: 8.7 x 5.7 x 1.1 inches
About the Book (पुस्तक के विषय में):
आज का भारतीय समाज परंपरागत ढांचे से बाहर निकलकर एक आधुनिक समाज के रूप में उभर रहा है। यह पुस्तक भारतीय समाज के इस संक्रमण काल को गहराई से विश्लेषित करती है और उन सामाजिक व्यवस्थाओं, परंपराओं, संघर्षों तथा बदलावों को उजागर करती है जो इस परिवर्तन के मूल में हैं।
डॉ. राम आहूजा द्वारा लिखित यह पुस्तक आधुनिक भारत की सामाजिक संरचना, उसमें हो रहे परिवर्तनों, योजनाओं की सफलता-असफलता, आरक्षण नीति, सामाजिक आंदोलनों, जातीय व्यवस्था, जनसंख्या गतिकी, भ्रष्टाचार, काला धन, तस्करी, नगरीयकरण, जनजातीय जीवन और धर्म जैसे ज्वलंत मुद्दों का गहन समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
पुस्तक यह स्पष्ट करती है कि यदि समाज के कमजोर वर्गों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के आन्दोलनों को रोका नहीं गया तो सामाजिक असंतोष को नियंत्रित करना कठिन होगा। इस संदर्भ में लेखक ने यह भी प्रश्न उठाया है कि क्या वर्तमान सत्ताधारी अभिजन सामाजिक नीतियों में आवश्यक बदलाव लाने की इच्छाशक्ति रखते हैं?
इस पुस्तक में समकालीन भिन्नताओं, परिवर्तनशील प्रवृत्तियों और भावी सामाजिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भारतीय समाज का वैज्ञानिक, तथ्यात्मक और विश्लेषणपरक प्रस्तुतीकरण किया गया है। यह कृति समाजशास्त्र के स्नातकोत्तर छात्रों के साथ-साथ यूपीएससी, पीसीएस, यूजीसी-नेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक सिद्ध होती है।
Contents (विषय सूची):
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भारतीय समाज का ऐतिहासिक परिदृश्य
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सामाजिक स्तरीकरण
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अनुसूचित जातियाँ, अस्पृश्यता और पिछड़ा वर्ग
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परिवार, विवाह और नातेदारी
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आर्थिक प्रणाली
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राजनैतिक व्यवस्था
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शैक्षिक व्यवस्था
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धर्म
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जनजातीय समाज
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ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था
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नगरीय सामाजिक संगठन
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जनसंख्या गतिकी
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भ्रष्टाचार
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काला धन
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तस्करी
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सामाजिक परिवर्तन और आधुनिकीकरण
About the Author (लेखक परिचय):
डॉ. राम आहूजा, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर रह चुके हैं। वे एक वरिष्ठ शिक्षाविद्, लेखक और शोधकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनके शोध के मुख्य क्षेत्र—अपराधशास्त्र, महिला अध्ययन, राजनीतिक समाजशास्त्र और सामाजिक समस्याएँ—भारत में व्यापक रूप से चर्चित रहे हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध-पत्र और लेख प्रकाशित किए हैं तथा भारत की प्रमुख पुलिस अकादमियों और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों में विगत दो दशकों से अतिथि व्याख्याता के रूप में सक्रिय रहे हैं।
उनकी अन्य प्रसिद्ध पुस्तकों में Social Problems in India, Criminology, Indian Social System, और Samajik Samasyaein शामिल हैं। उनकी लेखनी समाज की गहराई तक जाकर विश्लेषण प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती है।


