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Bharat Me Samajik Andolan (Social Movements In India)

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Book Details

  • Author: V.N. Singh and Janmejay Singh

  • Publisher: Rawat Publications

  • Language: Hindi

  • Edition: 2005

  • ISBN: 9788170339724

  • Pages: 316

  • Cover: Hardcover

  • Dimensions: 8.6 x 5.7 x 0.9 inches

About the Book

भारत में सामाजिक आन्दोलन एक बहुआयामी अध्ययन है जो भारतीय समाज में उभरे विविध जन आन्दोलनों को ऐतिहासिक और प्रादेशिक दृष्टिकोण से विश्लेषित करता है। यह पुस्तक इस विचार को प्रस्तुत करती है कि आन्दोलन समाज की विकास प्रक्रिया का अंग हैं—ये अपने युग की समस्याओं को सामूहिक रूप से समझने और सुलझाने का प्रयास करते हैं और इतिहास को एक दिशा देकर अंततः समाप्त हो जाते हैं, जब तक कि कोई नया आन्दोलन जन्म न ले।

भारत जैसे विशाल, विविधतापूर्ण देश में आन्दोलन अनेक रूपों में उभरे हैं—चाहे वह जनजातीय चेतना हो, किसान आक्रोश, महिला जागरूकता, दलित अधिकारों की मांग हो या पर्यावरण संरक्षण। इस पुस्तक में इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है। विशेष रूप से यह पुस्तक उन वर्गों पर प्रकाश डालती है जिन्हें अक्सर समाज के हाशिये पर रखा गया—जनजाति, किसान, श्रमिक और दलित—और दिखाती है कि चेतना और नेतृत्व की चिंगारी अक्सर यहीं से फूटी।

पुस्तक में सामाजिक आन्दोलनों की सैद्धान्तिकी, उनके सामाजिक परिवर्तन में योगदान, और भक्ति आन्दोलन से लेकर वैश्वीकरण तक के प्रभावशाली अध्याय शामिल हैं। यह समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य से न केवल वर्तमान को समझने का माध्यम है, बल्कि आगामी शोध कार्यों के लिए एक सशक्त आधार भी प्रस्तुत करती है।

यह पुस्तक समाजशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और उन सभी पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो भारतीय समाज में सामाजिक परिवर्तन की जड़ों को समझना चाहते हैं।

Contents

  • सामाजिक आन्दोलनों की सैद्घान्तिकी

  • भारत में सामाजिक आन्दोलन

  • सामाजिक आन्दोलन और सामाजिक परिवर्तन

  • सामाजिक पुनर्जागरण और सामाजिक सुधार आन्दोलन

  • भक्ति आन्दोलन और सामाजिक सुधार

  • किसान आन्दोलन

  • पंजाब और बिहार में किसान आन्दोलन

  • उत्तर प्रदेश में किसान आन्दोलन

  • जनजातीय आन्दोलन

  • नक्सलवादी आन्दोलन

  • श्रमिक आन्दोलन

  • दलित आन्दोलन

  • महिला आन्दोलन

  • सम्पूर्ण क्रांति

  • सर्वोदय आन्दोलन

  • पर्यावरण जागरूकता आन्दोलन

  • भूमण्डलीकरण – एक परोक्ष आन्दोलन

About the Author

वी. एन. सिंह, डी.बी.एस. (पी.जी.) कॉलेज, कानपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में रीडर और अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने समाजशास्त्र विषय पर दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है और सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों पर सौ से अधिक लेख व शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।

जनमेजय सिंह, कानपुर विश्वविद्यालय से एम.ए. प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र हैं। उन्होंने अनेक पुस्तकों का सह-लेखन किया है और उनका शैक्षणिक कैरियर उत्कृष्ट रहा है।