{"product_id":"sociology-of-sanitation-3","title":"स्वच्छता का समाजशास्त्र (Sociology of Sanitation)","description":"\u003ch3\u003eBook Details\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAuthor\/Editor\u003c\/strong\u003e: B.K. Nagla\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePublisher\u003c\/strong\u003e: Rawat Publications\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLanguage\u003c\/strong\u003e: Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eEdition\u003c\/strong\u003e: 2023\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eISBN\u003c\/strong\u003e: 9788131613023\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePages\u003c\/strong\u003e: 204\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eCover\u003c\/strong\u003e: Paperback\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eSale Territory\u003c\/strong\u003e: India\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003chr\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Book\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003e‘स्वच्छता का समाजशास्त्र’\u003c\/strong\u003e स्वच्छता और समाज के मध्य अंतर्निहित सम्बन्धों का गहन समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ न केवल स्वच्छता को शारीरिक या भौतिक क्रिया के रूप में देखता है, बल्कि इसे सामाजिक चेतना, असमानता, जातीय संरचना, और नैतिक बोध से जोड़कर प्रस्तुत करता है। भारत के सामाजिक-धार्मिक परिप्रेक्ष्य में महात्मा गांधी, डॉ. अम्बेडकर, संत गाडगे बाबा, सूर्यकान्त पाठक और डॉ. विन्देश्वर पाठक जैसी विभूतियों के कार्यों को रेखांकित करते हुए यह पुस्तक दर्शाती है कि कैसे स्वच्छता आंदोलनों ने सामाजिक परिवर्तन की दिशा तय की है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रभाव और उसकी सामाजिक व्याप्ति को भी इस पुस्तक में समाविष्ट किया गया है। पुस्तक के अध्याय समकालीन विचारधारा, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक संस्थाओं की भूमिका और पर्यावरणीय पहलुओं को समेटते हैं, जिससे यह शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और जनसामान्य के लिए एक उपयोगी साहित्य बन जाती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह पुस्तक उन सभी के लिए उपयोगी है जो स्वच्छता, सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरणीय जागरूकता के अंतर्संबंधों को समझना चाहते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003chr\u003e\n\u003ch3\u003eContents\u003c\/h3\u003e\n\u003col\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता का समाजशास्त्र: एक परिचयात्मक विमर्श \/ बी.के. नागला\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eप्रोफेसर डॉ. विन्देश्वर पाठक: एक परिचय \/ बी.के. नागला\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता एवं पर्यावरण \/ महात्मा गांधी\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपूर्व-आधुनिक युग में अस्पृश्यता एवं स्वच्छता \/ हेतुकर झा\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eभारत में स्वच्छता आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि \/ अनिल वाघेला\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eआधुनिक भारत में धार्मिकता एवं स्वच्छता \/ आशीष सक्सेना एवं विजयलक्ष्मी सक्सेना\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता और सामाजिक संस्थाएं \/ रिचर्ड पाइस\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता, स्वास्थ्य और समाज \/ बी.के. नागला\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता और पर्यावरण \/ अनिल वाघेला\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eभारत में स्वच्छता कार्यक्रम \/ मोहम्मद अकरम\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता का समाजशास्त्र: विन्देश्वर पाठक के साथ साक्षात्कार \/ बी.के. नागला एवं आशीष कुमार\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eस्वच्छता एवं समाज: एक आलोचनात्मक दृष्टि \/ राजीव गुप्ता एवं एस.सी. चौहान\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ol\u003e\n\u003chr\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Author\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eबी.के. नागला\u003c\/strong\u003e, विख्यात समाजशास्त्री, महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक के प्रोफेसर रहे हैं। आपने बड़ौदा, नई दिल्ली, कोटा और बनारस के विश्वविद्यालयों में भी शिक्षा दी है। आपके शोध पत्र देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं और समाजशास्त्र एवं अपराधशास्त्र में विशेष योगदान के लिए अनेक राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं। आपकी लेखनी समाज में बदलाव की दिशा में प्रेरणास्रोत रही है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rawat Publications","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49994877436208,"sku":"DRG.RawatPublications_9788131613023","price":421.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/Swachachata_Ka_Samajshastra1.jpg?v=1756464938","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/sociology-of-sanitation-3","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}