{"product_id":"sahitya-samkalin-sarokar","title":"SAHITYA SAMKALIN SAROKAR","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e RANJANA MISHRA\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e First Edition\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eFeatures:\u003c\/b\u003e \u003c\/p\u003e\u003cul\u003e\n\u003cli\u003eखण्ड - एक : काव्य-विमर्श—1. रामचरितमानस 2. समकालीन कविता 3. प्रगतिवाद : सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति 4. भारतीय धर्म निरपेक्षता के आधार पुरुष-कबीर 5. 'पसीना बोलता है'–एक दृष्टि में (समीक्षा) खण्ड - दो : कथा-साहित्य समीक्षा 6. साहित्य का सामाजिक सरोकार : नयी कहानी के सन्दर्भ में 7. समकालीन हिन्दी साहित्य में दलित-विमर्श 8. समकालीन हिन्दी कहानी में सामाजिक अवचेतना 9. मैला आँचल : संवेदना और शिल्प\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eखण्ड - तीन : स्त्री केन्द्रित चिन्तन—10. स्त्री शक्ति का प्रमुख स्तम्भ-झलकारी 11. आधुनिक हिन्दी कहानी : महिला साहित्यकारों का प्रदेय 12. हिन्दी महिला कथा-लेखन 13. महिला सशक्तीकरण 14. समकालीन भारतीय समाज में अपराध : महिलाओं विशेष में 15. महिला असुरक्षा और बढ़ते अपराध में चैनलों की भूमिका खण्ड - चार : हिन्दी और मीडिया 16. हिन्दी पत्रकारिता 17. हिन्दी भाषा का बदलता स्वरूप 18. हिन्दी में विज्ञान लेखन 19. संचार क्रान्ति 20. जनसंचार माध्यमों में प्रयुक्त हिन्दी का स्वरूप\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eखण्ड - पाँच : उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार—21. उच्च शिक्षा में गुणवत्ता प्रबन्धन की प्रासंगिकता : वर्तमान सन्दर्भ 22. उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के विविध आयाम : मध्य प्रदेश के सन्दर्भ में 23. समग्र सतत मूल्यांकन : उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार का माध्यम\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eखण्ड - छह : बुन्देली संस्कृति एवं विविध विमर्श—24.बुन्देलखंड : सांस्कृतिक अभिचेतना : बाह्य स्वरूप 25. लोक-साहित्य : बुन्देलखंड के झरोखे से 26. बुन्देली धरती : सामाजिक विसंगतियाँ 27. इक्कीसवीं सदी में नैतिक मूल्यों का क्षरण : भारतीय सन्दर्भ में 28. भारत में मानवाधिकारों सम्बन्धी जागरूकता 29. मादक द्रव्यों के सेवन की प्रवृत्ति : भारतीय सन्दर्भ में\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eखण्ड - सात : पर्यावरण चिन्तन—30. पर्यावरण प्रबन्धन : वर्तमान सन्दर्भ में 31. जनसंख्या वृद्धि और पर्यावरण प्रदूषण 32. औद्योगीकरण के दुष्प्रभाव : वर्तमान सन्दर्भ में 33. भारत में पर्यावरण जागरूकता\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 144\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2015\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e आज का आदमी अपने जीवन की सार्थकता इस बात में समझता है कि वह भीड़ में भी पहचान लिया जाये। व्यक्तित्व के प्रति जागरूकता और अस्तित्व की सार्थकता उसे स्वस्थ मूल्यों के प्रति अग्रसर करती है। समकालीन कविता में आधुनिक भावबोध के साथ ही तर्क, विचार एवं चिन्तन की प्रधानता होने से वैज्ञानिक बोध भी समाविष्ट है। समकालीन कविता जीवन की व्याख्या है। वह जीवन और परिवेश को संवेदना के धरातल पर अनुभव करके शिल्पगत सौन्दर्य के साथ अभिव्यक्त करती है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789383962181\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.5 x 5.6 x 0.7 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi, English\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901201781040,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_9383962186","price":299.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/51GUT9Z6uIL.jpg?v=1780568749","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/sahitya-samkalin-sarokar","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}