{"product_id":"sahitya-ka-manosandhan-साहित्य-का-मनोसंधान","title":"Sahitya Ka Manosandhan \/ साहित्य का मनोसंधान","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Garg \/ मृदुला गर्ग, Mridula\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Penguin Swadesh\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e Paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 184\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 30-04-2025\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e हिंदी में निबंध लेखन की स्वस्थ परंपरा रही है। साहित्य का मनोसंधान उसी की दिलचस्प व पठनीय कड़ी है। कथा साहित्य में लेखक वस्तुस्थिति के समांतर एक संसार रचता है; निबंध में उससे सीधे मुठभेड़ करता है। दोनों तरह के लेखन का प्रमुख स्वर, भिन्न नज़रिया और प्रचलित मान्यता से प्रतिरोध हो सकता है, जो मृदुला गर्ग का है। निबंध में उसकी अभिव्यक्ति के लिए स्वरचित किरदारों का सहारा नहीं लेना पड़ता। तथ्यों की आँखों में आँखें डाल कर उनकी मनोवैज्ञानिक पड़ताल की जा सकती है। समाज, व्यवस्था और व्यक्ति के परस्पर घात प्रतिघात का सीधे जायजा लिया जा सकता है। मात्र विश्लेषण करके नहीं। प्रज्ञा और सौंदर्य बोध के प्रयोग से रस और रसोक्ति, दोनों पैदा कर के। इस पुस्तक में मनोसंधान का फलक खूब विस्तृत और गहन है। इसमें केवल बौद्धिक छटपटाहट नहीं, हार्दिक संवेदन और मनोरंजन है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9780143475309\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.8 x 8.0 x 0.7 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Penguin Swadesh","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50756561535280,"sku":"Prakash_9780143475309","price":239.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/71FpTRbgf6L.jpg?v=1770789541","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/sahitya-ka-manosandhan-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}