{"product_id":"mahila-sashaktikaran-avam-narivad-women-empowerment-and-feminism","title":"Mahila Sashaktikaran Avam Narivad (Women Empowerment And Feminism)","description":"\u003ch3\u003eBook Details\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePublisher\u003c\/strong\u003e: Rawat Publications\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAuthor\u003c\/strong\u003e: P.D. Sharma\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBinding\u003c\/strong\u003e: Hardcover\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eNumber of Pages\u003c\/strong\u003e: 222\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eRelease Date\u003c\/strong\u003e: 01-01-2017\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eISBN\u003c\/strong\u003e: 9788131608913\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLanguages\u003c\/strong\u003e: Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Book\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003eयह कृति महिला सशक्तीकरण के उस विवादास्पद विषय की एक विस्फोटक विवेचना है, जिस पर भारत में आम राय बनने में अभी पूरी शताब्दी लग सकती है। सदियों से पतिभक्ति में दीक्षित भारतीय नारी अभी तो ‘मुक्ति’ का संघर्ष लड़ रही है, और इस मुक्ति के लिए उसे शक्ति चाहिए, जिससे वह उस पश्चिमी नारी के समकक्ष खड़ी हो सके, जो अब शक्ति से आगे ‘तृप्ति’ का संघर्ष लड़ना चाहती है। भक्ति, मुक्ति, शक्ति और तृप्ति की ये ‘चार लहरें’ नारी शक्ति को एक अभिव्यक्ति देती हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसिमोन डी बोउवा का कहना है कि महिलाएं पैदा नहीं होती, बल्कि बनाई जाती हैं। वे इसे धर्म, संस्कृति और पैट्रिआर्की (patriarchy) का एक षड्यंत्र मानती हुई विवाह और परिवार की दोनों संस्थाओं को नये ढंग से गढ़ना चाहती हैं। यह नारीवादी सशक्तीकरण आज के विज्ञान के युग में इस पुरुष-प्रधान संरचना को किस तरह ध्वस्त करना चाहता है, इसका सघन विश्लेषण पुस्तक में देखा जा सकता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक के विभिन्न अध्यायों में नारी मुक्ति के संघर्ष की चार लहरों, नारी जीवन पर पुरुष की खण्डित दृष्टि, और ‘स्त्री देह’ की असुरक्षाओं और जोखिमों को उठाया गया है। इसके अलावा, यह विवाह और परिवार की संस्थाओं का नारीवादी विरोध, उभरते हुए वैज्ञानिक विकल्पों, सहचर्य की सैक्स शिक्षा, और वैवाहिक हिंसा के समाधान के संबंध में एक समालोचनात्मक विवेचना प्रस्तुत करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक के उत्तरार्द्ध में, बाजारवाद, फैशन, विज्ञापन, कानून, और मार्क्सवादी विचारधारा द्वारा महिला को दी जा रही शक्ति पर चर्चा की गई है, और यह सशक्तीकरण, स्वतंत्रता, समानता, और विज्ञान के सुविधाओं के साथ कैसे समन्वित हो सकता है, इस पर विचार किया गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक के अंतिम अध्याय में परिपूर्णता का स्त्री विमर्श नारीवादी तर्कों पर संतुलित सोच विकसित करने का उद्देश्य प्रस्तुत करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003ch3\u003eContents\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eमहिला मुक्तिकरण का नारीवादी संघर्ष: सशक्तीकरण की चार यूरोपीय लहरें\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eनारी जीवन पर खण्डित दृष्टियां: महिलाएं पैदा नहीं होती, बनाई जाती हैं\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eअसुरक्षा के जोखिमों से घिरी ‘स्त्री देह’\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eविवाह और परिवार की संस्थाओं का नारीवादी विरोध: पुरुष वर्चस्व का एक षड्यंत्र\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eयौन सहचर्य की सैक्स शिक्षा वैवाहिक हिंसा घटाती है\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eविज्ञान के युग के नारीवादी विकल्प\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eसशक्तीकरण का नारीवाद: उपभोक्तावादी और मार्क्सवादी दृष्टियां\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eविरोधाभासी पूर्णता का स्त्री विमर्श: यहां से कहां\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Author\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003eपी.डी. शर्मा (जन्म 1933) राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन विभागों के विभागाध्यक्ष रहे हैं। हिन्दी साहित्य, इतिहास और राजनीति विज्ञान विषयों में विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेता डा. शर्मा ने मिनसोटा विश्वविद्यालय, मिनियापोलिस से एम पी ए और पीएचडी की उपाधियाँ अर्जित की हैं। वे नार्थ कैरोलिना और मिनसोटा के अमेरिकी परिसरों पर एक विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में नाॅन वेस्टर्न स्टडीज के क्षेत्र में अध्ययन, अध्यापन और शोधकार्य कर चुके हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rawat Publications","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49992361247024,"sku":"DRG.RawatPublications_9788131608913","price":647.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/41rIKcx5byL.jpg?v=1756465196","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/mahila-sashaktikaran-avam-narivad-women-empowerment-and-feminism","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}