{"product_id":"kavita-kya-kahan-kyon","title":"Kavita : Kya Kahan Kyon","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Ashok Vajpeyi\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 358\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-01-2021\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e यह पुस्तक विधिवत् लिखी गयी पुस्तक नहीं है : पिछले छह दशकों से कविता के बारे में समय-समय पर जो सोचा-गुना-लिखा, उसका संचयन है। *** *** *** स्वयं कवि होने के नाते मैंने कविता की, अल्पसंख्यकता के बावजूद, अपनी जगह खोजने-पाने की जद्दोजहद और उस पर बेजा क़ब्ज़ा न करने देने की सावधानी भरसक अलक्षित नहीं जाने दी है। कविता किसी बिल में नहीं दुबकी है और, सौभाग्य से, वह साहस-संघर्ष-सौन्दर्य-अन्त:करण का अवाँगार्द बनी हुई है। वह साहचर्य का स्थल है : कल्पना और स्वप्न की रंगभूमि भी। यह आरोप लग सकता है कि मैंने कविता से बहुत अधिक की उम्मीद लगा रखी है : मैं उसे स्वीकार करता हूँ क्योंकि मुझे कभी कविता के सिलसिले में कम-से-कम का ख़याल नहीं आया। एक कारण यह भी कि संसार की कविता कम-से-कम की नहीं अधिक-से-अधिक की भावना जगाती रही है। अगर पाठकों में कविता को लेकर कुछ उद्वेलन और उत्सुकता यह संचयन जगा पाये तो उसकी मेरी लम्बी और निस्संकोच पक्षधरता अकारथ नहीं जायेगी।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789389598964\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.8 x 5.9 x 1.3 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66904972230960,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9789389598964","price":688.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/51L3hdmgteL.jpg?v=1780682599","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/kavita-kya-kahan-kyon","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}