{"product_id":"kaljayee-kumar-gandharv-hardcover-kapalini-komkali-rekha-inamdar-sane-kalapini-komkali-rekha-inamdar-sane-jan-01-2014","title":"Kaljayee Kumar Gandharv [hardcover] Kapalini Komkali,Rekha Inamdar-Sane,Kalapini Komkali,Rekha Inamdar-Sane [Jan 01, 2014] …","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Kapalini Komkali\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Vani Prakashan\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e First Edition\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 278\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2014\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789350728253\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.8 x 7.3 x 0.9 inches\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकालजयी कुमार गंधर्व - भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपनी बहुमुखी प्रतिभा से कभी न मिटनेवाली नाममुद्रा अंकित करनेवाले युगप्रवर्तक संगीतकार, वाग्गेयकार, गायक पंडित कुमार गंधर्व की नब्बेवी जन्मजयंती के उपलक्ष्य में 'कालजयी कुमार गंधर्व' यह ग्रंथ दो भागों में संपादित किया गया है। पंडित कुमार गंधर्व की प्रखर प्रतिभा, प्रयोगशीलता के संदर्भ में उनकी सांगीतिक विचारशीलता का मर्म समझने का प्रयास इन ग्रंथों में किया गया है। हिंदी-अंग्रेज़ी (संयुक्त) एवं मराठी भाषाओं में छपे यह दोनों ग्रंथ स्वतंत्र हैं। इनमें समाविष्ट किये गए लेख भाषांतरित न होकर भिन्न-भिन्न हैं। कभीभी, किसीभी पृष्ठ को खोलकर पढ़ने का आनन्द पाठकों को इन संग्राह्य ग्रंथों के माध्यम से मिल सकेगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e कालजयी कुमार गंधर्व - भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अपनी बहुमुखी प्रतिभा से कभी न मिटनेवाली नाममुद्रा अंकित करनेवाले युगप्रवर्तक संगीतकार, वाग्गेयकार, गायक पंडित कुमार गंधर्व की नब्बेवी जन्मजयंती के उपलक्ष्य में 'कालजयी कुमार गंधर्व' यह ग्रंथ दो भागों में संपादित किया गया है। पंडित कुमार गंधर्व की प्रखर प्रतिभा, प्रयोगशीलता के संदर्भ में उनकी सांगीतिक विचारशीलता का मर्म समझने का प्रयास इन ग्रंथों में किया गया है। हिंदी-अंग्रेज़ी (संयुक्त) एवं मराठी भाषाओं में छपे यह दोनों ग्रंथ स्वतंत्र हैं। इनमें समाविष्ट किये गए लेख भाषांतरित न होकर भिन्न-भिन्न हैं। कभीभी, किसीभी पृष्ठ को खोलकर पढ़ने का आनन्द पाठकों को इन संग्राह्य ग्रंथों के माध्यम से मिल सकेगा।\u003cb\u003e\u003c\/b\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50055384826160,"sku":"DRG.VaniPrakashan_9789350728253","price":512.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/81xAGniZ9ZL.jpg?v=1756301952","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/kaljayee-kumar-gandharv-hardcover-kapalini-komkali-rekha-inamdar-sane-kalapini-komkali-rekha-inamdar-sane-jan-01-2014","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}