{"product_id":"guru-nanak-vaani-vividh-aayam-edited-by-ravindra-gasso-गुरु-नानक-वाणी-विविध-आयाम-संपादक-रविन्द्र-गासो","title":"Guru Nanak Vaani : Vividh Aayam (edited by Ravindra Gasso) -- गुरु नानक वाणी : विविध आयाम (संपादक : रविन्द्र गासो)","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Jagroop Singh Gill -- जगरूप सिंह गिल, Kaamraaj Sindhu -- कामराज सिन्धु\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya Books\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e Ist\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e perfect\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 158\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2022\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e ...गुरु नानक देव जी ने भक्ति की सम्पूर्णता, प्रभु-नाम की निरन्तरता और चित्त (मन) की एकाग्रता दृढ़ करवाने के लिए रागों पर आधारित वाणी का उच्चारण किया और उसका गायन किया। संगीत के सुरों में जब धुर की वाणी (गुरवाणी) रूपी पदार्थ डाला जाता है तो वह मनुष्य के मन को इस प्रकृति के कर्ता परमात्मा से मिलाप करा देता है। संगीत, हर व्यक्ति की सुरति को गुरवाणी के शब्दों के साथ जोड़ने का माध्यम है। गुरु नानक देव जी द्वारा रचित रागात्मक वाणी ने, सुर और सुरति के संगम अर्थात् कीर्तन ने सज्जन ठग पर ऐसा वार किया कि उसके अन्तर्मन का ठग मर गया। कौड़ा राक्षस पर इस कीर्तन ने ऐसा प्रभाव डाला कि वह देवता-पुरुष बन गया। वली कन्धारी के अहंकार पर इस कीर्तन ने ऐसी चोट मारी कि उसका घमंड मटियामेट हो गया। गुरु नानक देव जी द्वारा रचित वाणी ने सुर और सुरति के मिलाप के साथ ऐसा कमाल दिखाया जो इस दुनिया के घातक हथियार भी नहीं दिखा सकते। गुरु जी जब भी भाई मरदाना जी को कहते, “मरदानिया! छेड़ रबाब, कोई सिफ्त खुदा के दीदार की करें” तो मरदाना जी रबाब बजाना आरम्भ करते और गुरु जी के मुखारविन्द से इलाही-वाणी का गायन शुरू हो जाता, जिससे भटके मन प्रभु, परमात्मा के चरणों में लीन हो जाते। गुरु जी द्वारा आरम्भ किया हुआ कीर्तन का दरिया कपटी मनों की मैल उतारता हुआ ईर्ष्या-द्वेष की भावना को समाप्त करता हुआ, सदियों से लगातार चल रहा है और आने वाले युगों तक चलता रहेगा। गुरु जी द्वारा अपनी रचित वाणी उन्‍नीस (19) रागों में है जिसको अलग-अलग अवस्थाओं में निर्धारित समय पर गाया जाता है जिसका सीधा असर मनुष्य के मन पर ही पड़ता है। हर मनुष्य का मकसद गुरवाणी के शब्द के साथ जुड़ने का है जो कि असल प्रभु-ज्ञान है, जिससे हर कोई परमात्मा का अहसास, प्रेम-भाव और प्रेम-रस प्राप्त कर सकता है। ...इसी पुस्तक से...\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.0 x 6.0 x 0.5 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901235859760,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_B09R2BWTM4","price":143.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/6183McCEesL_8824f6fa-ac85-4957-8a52-d257d7e0b3e7.jpg?v=1780573015","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/guru-nanak-vaani-vividh-aayam-edited-by-ravindra-gasso-%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7-%e0%a4%86%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8b","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}