{"product_id":"gaon-svashasan-aur-panchayati-sansthan-गांव-स्वशासन-और-पंचायति-संस्थान","title":"GAON, SVASHASAN AUR PANCHAYATI SANSTHAN | गांव, स्वशासन और पंचायति संस्थान","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e MANTHAN मंथन\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e First Edition\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eFeatures:\u003c\/b\u003e \u003c\/p\u003e\u003cul\u003e\u003cli\u003eपंचायत, गांव, स्वशासन, खेत, गांव में न्याय व्यवस्था\u003c\/li\u003e\u003c\/ul\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 160\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2016\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e यह किताब मानती है कि गाँव के बुनियादी घटकों को रखांकित किये बिना, उन घटकों की सकारात्मकता और नकारात्मकता को विश्लेषित किये बिना गाँव की प्रासंगिकता, गाँव का भविष्य मापने के मनमाने चलन को चुनौती मिलनी चाहिए। यह किताब कहती है कि गाँव और ग्राम सभा की शक्ति का विस्तार सिर्फ कानूनी अधिकारों पर निर्भर नहीं होता। सामाजिक-सांस्कृतिक और शासनेत्र (शासनमुक्त) अभिव्यक्तियों की भी जन-राजनीतिक विष्पत्तियाँ हो सकती हैं। यह कृति सचेत करना चाहती है कि समुदाय-केन्दित आकांक्षाओं, क्षेत्रीय आकांक्षाओं औत तात्कालिक अनुकूलताओं का स्वशासन के बुनियादी और दीर्घकालिक कारकों के साथ अपमिश्ण नहीं होने देना चाहिये। कुछ विधानों के दुष्प्रभाव से संरक्षण को स्वशान नहीं माना जा सकता। शासन ने जो भूमिका छीन ली है, शासन ने जो भूमिका आज तक नहीं दी-उन भूमिकाओं को थोड़ा दे दे और उसे वापस लेने का अधिकार अपने पास ही रखे रहे-इसे भी स्वशान नहीं माना जा सकता। यह रचना इस निष्कर्ष है कि नगर-केन्द्रत, उद्योग-केन्द्रित (विशेषर पूँजी-प्रधान), बड़ा उद्योग-केन्द्रित, प्रतिनिधि-केन्द्रित से भी ज्यादा नौकरशाल-केन्द्रित यह पूरा तंत्र गाँव को कमजौर किये हुए हैं। गाँव की समाजिक-सांस्कृतिक अस्मिता पर गाँव की राजनीतिक-प्रशासनिक मान्या आरोपित है। गाँव के अस्तित्व का मसला भी प्रशासनिक एकाधिकार में सिमटा है। अधिकांश बौद्धिकों के चिन्तन की गाँव-चिरागी मानसिकता के कारण ग्रमपक्षीय बौद्धिक अभियान कमजोर और दिग्भ्रमित रहता है। एेसे प्रतिकूल और चुनौतिपूर्ण समय में तमाम गाँंवो को आन्तरिक और व्यापक समताबोधी एकजुटता से ही गाँव की शक्ति जगेगी, बढेगी, विराट बनेगी। संविधान में गाँव की जगह के मलसे पर भी इस किताब ने सूक्ष्मता से छानबीन करने की कोशिश की है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789383962365\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.5 x 5.6 x 0.5 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi, English\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901249294640,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_9383962364","price":94.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/61EvLTykzSL.jpg?v=1780573948","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/gaon-svashasan-aur-panchayati-sansthan-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}