{"product_id":"gaban-गबन","title":"Gaban\/गबन","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Premchand\/प्रेमचंद\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Penguin Swadesh\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 294\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 21-10-2024\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e संसार के अग्रणी कथाकारों में प्रतिष्‍ठित उपन्यास-सम्राट प्रेमंचद ने गबन में टूटते मूल्यों के अंधेरे में भटकते मध्यवर्ग का वास्तविक चित्रण किया है।\u003cbr\u003e\nयह रमानाथ की कहानी है, जो सुंदर, सुख-सुविधा चाहने वाला, घमंडी और नैतिक रूप से कमज़ोर है। वह अपनी पत्नी जलपा को ख़ुश करने के लिए उसे गहने उपहार में देने की कोशिश करता है, जिसे वह अपनी कम तनख्वाह से नहीं खरीद सकता, कर्ज में डूब जाता है, जो अंततः उसे गबन करने पर मजबूर करता है।\u003cbr\u003e\nगबन का मूल संदेश है कि इंसान को अपनी हैसियत के मुताबिक ही अपनी ज़रूरतों को पूरा करना चाहिए। उसका एक गलत कदम कई ज़िंदगियों को प्रभावित करता है। उपन्यास के नायक-नायिका रमानाथ, जलपा के साथ रतन, देवीदीन, जौहरा, वकील साहब आदि पात्रों का विश्लेषण भी किया गया।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9780143471493\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.2 x 5.2 x 0.8 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Penguin Swadesh","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50123316396336,"sku":"Trans_9780143471493","price":188.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/81LLzlHmVqL.jpg?v=1757330820","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/gaban-%e0%a4%97%e0%a4%ac%e0%a4%a8","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}