{"product_id":"dinkar-ki-sooktiyan-dinkar-granthmala-दिनकर-की-सूक्तियाँ-दिनकर-ग्रंथमाला","title":"Dinkar Ki Sooktiyan : Dinkar Granthmala | दिनकर की सूक्तियाँ : दिनकर ग्रंथमाला","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Ramdhari Singh Dinkar\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 160\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2019\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003emodel number:\u003c\/b\u003e 9389243777\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePart Number:\u003c\/b\u003e 9389243777\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e सूक्तियों की भूमिका अक्सर प्रेरक होती है। वे हमारी संवेदना और विचारों को स्पर्श कर परिष्कृत करने का काम करती हैं। वे किसी भी भाषा में लिखी गई हों, बोलचाल में इस तरह घुलमिल जाती हैं कि उद्देश्य हो या उपदेश उसकी पूर्व पीठिका की तैयारी में सहज ही उदाहरण बन व्यक्त हो जाती हैं, और बात की प्रामाणिकता तनिक बढ़ जाती है। सूक्ति-संग्रह का रिवाज उर्दू में रहा है, मगर हिन्दी में यह यदा-कदा ही देखने को मिलता है। संस्कृत में भी एक समय सुभाषित-संचय की प्रथा खूब बढ़ी थी। ऐसे शब्द-समूह, वाक्य या अनुच्छेदों को सुभाषित कहते हैं जिसमें कोई बात सुन्दर ढंग से या बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से कही गई हो। शायद इसी से प्रेरित हो कभी दिनकर जी ने भी कई सुभाषित रचे थे जो उनके ‘नये सुभाषित’ संग्रह में शामिल हैं। और दिनकर जी की मानें तो ‘वर्तमान संग्रह में नए सुभाषित से एक पंक्ति भी नहीं ली गई है। इस संग्रह की सभी सूक्तियाँ मेरे नाना काव्य-संग्रहों में से चुनी गई हैं।’ न, ‘दिनकर की सूक्तियाँ’ एक राष्ट्रकवि की एक ऐसी कृति है जो विचारोत्तेजक और मार्गदर्शक तो है ही, प्रखर चिन्तन और मानवतावादी दर्शन का एक अनुपम संग्रह भी है।.\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789389243772\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 7.7 x 5.1 x 0.5 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66903991877936,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9789389243772","price":241.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/81ktxlgsRyL.jpg?v=1780652540","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/dinkar-ki-sooktiyan-dinkar-granthmala-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%a5%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}