{"product_id":"criminology-3","title":"अपराधशास्त्र (Criminology)","description":"\u003ch3\u003eBook Details\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAuthors:\u003c\/strong\u003e राम आहूजा एवं मुकेश आहूजा (Ram Ahuja \u0026amp; Mukesh Ahuja)\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePublisher:\u003c\/strong\u003e Rawat Publications\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLanguage:\u003c\/strong\u003e Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBinding:\u003c\/strong\u003e Hardcover\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eNumber of Pages:\u003c\/strong\u003e 452\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePublication Date:\u003c\/strong\u003e 17-04-2023\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eISBN:\u003c\/strong\u003e 9788131613061\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Book\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003eभारत में अपराधशास्त्र पर बहुत कम पुस्तकें लिखी गई हैं। प्रस्तुत पुस्तक, जो लेखक के इस विषय में विशेष रुचि एवं गहन अध्ययन का परिणाम है, इस महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में स्वदेशी साहित्य की एक कड़ी के रुप में है। यह पुस्तक न केवल भारतीय विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर स्तर पर अपराधशास्त्र में निर्धारित पाठयक्रम को अपनी परिधि में लेती है बल्कि उन विषयों का भी विश्लेषण करती है जिनको सम्भावित रुप से स्नातकोत्तर स्तर पर प्रारम्भ किया जा सकता है। इनमें से कुछ विषय महिलाओं के विरुद्ध अपराध, राजनैतिक अपराध, तथा युवा और अपराध आदि हैं। अधिकतर विषयों का आलोचनात्मक विश्लेषण समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण की ओर उन्मुख है और समष्टिवादी परिप्रेक्ष्य पर आधारित है। जहां कहीं आवश्यक समझा गया वहां सैद्धान्तिक व्याख्या भी दी गई है। इस प्रकार यह पुस्तक इस क्षेत्र में उपयुक्त पाठ्यपुस्तक के रुप में लम्बे समय से अनुभव की जाने वाली कमी की पूर्ति करती है। इसके साथ ही यह निश्चय ही विस्तृत विषय पढ़ने वालों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी क्योंकि यह सरल शैली एवं अधिकारिक शब्दावली में अपराधशास्त्र के महत्त्वपूर्ण विषयों की सुबुद्ध समीक्षा प्रस्तुत करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003ch3\u003eContents\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eअपराध, अपराधी और अपराधशास्त्र\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eअपराधी व्यवहार के सिद्धान्त\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eअपराध के कारक\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eबाल अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eमहिला अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eसंगठित अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eश्वेतवसन (व्यावसायिक) अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपेशेवर अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eराजनैतिक अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eमहिलाओं के प्रति अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eयुवा और अपराध\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eदण्ड\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eप्राण दण्ड\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eकारागृह\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपरिवीक्षा एवं पैरोल\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपुलिस\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eअपराध में क्षतिग्रस्त व्यक्ति\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Authors\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eराम आहूजा\u003c\/strong\u003e राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के समाजशास्त्र विभाग के प्रोपफेसर व विभागाध्यक्ष एवं भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद (ICSSR) के सीनियर फेलो रहे हैं। दीर्घ शैक्षणिक व शोध अनुभव के आधार पर उनकी अनेक पुस्तकें और शोध प्रबंध प्रकाशित हो चुके हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और प्रादेशिक अकादमियों और प्रशासकीय प्रशिक्षण संस्थाओं में वे दो दशकों तक अतिथि-वक्ता रहे हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eमुकेश आहूजा\u003c\/strong\u003e ने राजस्थान विश्वविद्यालय से 1993 में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वर्तमान में आप महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितौड़गढ़ के समाजशास्त्र विभाग में कार्यरत हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rawat Publications","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49992627290416,"sku":"DRG.RawatPublications_9788131613061","price":777.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/810WoWXqYIL.jpg?v=1756465103","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/criminology-3","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}