{"product_id":"भारत-में-परिवार-विवाह-और-नातेदारी-द्वितीय-संस्करण-1","title":"भारत में परिवार विवाह और नातेदारी (द्वितीय संस्करण)","description":"\u003ch3\u003eBook Details\u003c\/h3\u003e\n\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAuthor:\u003c\/strong\u003e शोभिता जैन (Shobhita Jain)\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePublisher:\u003c\/strong\u003e Rawat Publications\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLanguage:\u003c\/strong\u003e Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eBinding:\u003c\/strong\u003e Paperback\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eNumber of Pages:\u003c\/strong\u003e 414\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePublication Date:\u003c\/strong\u003e 07-08-2023\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eISBN:\u003c\/strong\u003e 9788131613412\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Book\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003eमातृभाषा हिन्दी में तो क्या, अंग्रेजी सहित भारत की किसी भी भाषा में परिवार, विवाह और नातेदारी संबंधों के सर्वांगीण एवं समसामयिक विवेचन का सर्वथा अभाव रहा है। डा. शोभिता जैन द्वारा मौलिक रूप से लिखी गई यह पुस्तक इस कमी को पूरा करने का प्रथम प्रयास है। यह एक सुगम पाठ्य पुस्तक तो है ही, साथ में इसे विचारपूर्ण समन्वय, सारग्रंथों के अधुनातन निष्कर्षों और स्पष्ट एवं सटीक भाषा में निरूपित दृष्टान्तों की त्रिवेणी भी कहा जा सकता है। जहाँ एक ओर पितृवंशीय परिवार, विवाह एवं नातेदारी की समग्र व्याख्या की गई है, वहीं दूसरी ओर भारत के दक्षिण-पश्चिमी एवं उत्तर-पूर्वीय अंचलों में मातृवंशीय परम्पराओं का दिग्दर्शन इस खूबी के साथ किया गया है कि पूरे भारत का समाजशास्त्रीय मानचित्र स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ जाता है। भारतीय समाज की मूलभूत इकाईयों के माध्यम से विविधता में एकता का ऐसा विवरण व विवेचन इस पुस्तक से पहले हिन्दी में उपलब्ध ही नहीं था। यह ग्रंथ विद्यार्थियों, अध्यापकों और अध्येताओं के समक्ष न सिर्फ नई सामग्री प्रस्तुत करता है, बल्कि बदलते समाज में नये प्रतिमानों एवं मूल्यों के कीर्तिमान भी अंकित करता है। नातेदारी के समाजशास्त्र की तकनीकी शब्दावली और अवधारणाओं को इसमें आरेखों एवं परिशिष्टों की मदद से सहज, सरल और पठनीय कर दिया गया है। वर्तमान बौद्धिक परिवेश में जहाँ मातृभाषा हिन्दी अभूतपूर्व नये आयामों से सज्जित है वहीं प्रस्तुत कृति के बारे में यह कहा जाना अतिशयोक्ति न होगी कि अपने विषय में यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों में परखी जायेगी और खरी उतरेगी। प्रस्तुत द्वितीय संस्करण के एक विशेष अध्याय में भारतीय मुस्लिम समाज के विवाह एवं नातेदारी का विवेचन किया गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003ch3\u003eContents\u003c\/h3\u003e\n\u003col\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eप्रस्तावना: क्या, क्यों, कैसे और कहाँ\u003cbr\u003e\u003cstrong\u003eभाग एक: पितृवंशीय विवाह, परिवार और नातेदारी\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eविवाह और परिवार संबंधों का ताना-बाना: उत्तर भारत\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपरिवार और विवाह संबंधों का ताना-बाना: दक्षिण भारत\u003cbr\u003e\u003cstrong\u003eभाग दो: मातृवंशीय परिवार, विवाह और नातेदारी\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eमातृवंशीय परिवार और विवाह की छवि: दक्षिण-पश्चिम भारत में केरल के नायर\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eमातृवंशीय परिवार और विवाह की छवि: दक्षिण-पश्चिम तटीय लक्षद्वीप वेफ मुस्लिम\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eभारत के उत्तर-पूर्व अंचल में परिवार और विवाह: मातृवंशीय गारो\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eभारत के उत्तर-पूर्व अंचल में परिवार और विवाह: मातृवंशीय खासी\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eभारत के मुस्लिम समाजगत परिवार, विवाह एवं नातेदारी व्यवस्थाओं के विविध रूपों की छवि\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eबदलते परिवेश में नए प्रतिमानों एवं मूल्यों के कीर्तिमान: उपसंहार\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ol\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eपरिशिष्ट\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003col\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपरिवार, विवाह और नातेदारी की व्याख्या में प्रयुक्त कुछ तकनीकी शब्द और उनके अर्थ\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eहिंदी नातेदारी शब्दावली\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eमेओ नातेदारी शब्दावली\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eपुस्तक में प्रयुक्त अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों की सूची\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eसमाजशास्त्रीय\/नृशास्त्रीय तकनीकी शब्द संग्रह\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cp\u003eमानचित्र में दिए समूह\/स्थान नाम (पुस्तक में चर्चित कुछ मुख्य नाम)\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ol\u003e\n\u003ch3\u003eAbout the Author \/ Editor\u003c\/h3\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eशोभिता जैन\u003c\/strong\u003e ने प्राचीन भारतीय इतिहास में उच्च शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से और सामाजिक मानवशास्त्र में डिप्लोमा और एम.लिट. की उपाधियाँ ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय से प्राप्त कीं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र संस्थान से पी.एच.डी. करने के बाद इन्होंने 1982-83 में इंडियन सोशल इंस्टिट्यूट में महिला विकास कार्यक्रम के निदेशक के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त सुश्री जैन ने आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज़ और दक्षिण अफ्रीका में अध्यापन और शोध के पदों पर काम किया। संयुक्त राष्ट्र संघ की एफ.ए.ओ. शाखा ने इन्हें गुजरात में कृषिवानिकी के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए शोध परामर्शदाता नियुक्त किया और उसके बाद वे नई दिल्ली के मल्टिपल एक्शन रिसर्च ग्रुप (मार्ग) की मुख्य परामर्शदाता रहीं। वर्तमान में, वे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग से अवकाश प्राप्त प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। डा. जैन के कई शोध-लेख अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rawat Publications","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":49992688861488,"sku":"DRG.RawatPublications_9788131613412","price":421.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/Bharat_Me_Pariwar_Vivah_avam_Natedari_2nd_Ed.jpg?v=1756465097","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/products\/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-1","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}