Paschyatya Avam Bhartiya Arthshastri aur unka Chintan (Western and Indian Economists and Their Thought) Hindi
Paschyatya Avam Bhartiya Arthshastri aur unka Chintan (Western and Indian Economists and Their Thought) Hindi is backordered and will ship as soon as it is back in stock.
Couldn't load pickup availability
Genuine Products Guarantee
Genuine Products Guarantee
We guarantee 100% genuine products, and if proven otherwise, we will compensate you with 10 times the product's cost.
Delivery and Shipping
Delivery and Shipping
Products are generally ready for dispatch within 1 day and typically reach you in 3 to 5 days.
📘 Book Details:
-
Author: G.R. Verma
-
Publisher:Rawat Publications
-
Language: Hindi
-
Edition: 2012
-
ISBN: 9788131605431
-
Pages: 240
-
Cover: Paperback
-
Dimensions: 8.4 x 5.5 x 0.4 inches
📖 About the Book:
Paschyatya Avam Bhartiya Arthshastri Aur Unka Chintan हिन्दी में लिखी गई एक अद्वितीय पुस्तक है, जो दो सौ से अधिक पाश्चात्य एवं भारतीय अर्थशास्त्रियों के जीवन, शिक्षा, रचनाओं, पुरस्कारों और अन्य उपलब्धियों का संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित विवरण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक दो प्रमुख भागों में विभाजित है—पहला भाग पाश्चात्य अर्थशास्त्रियों पर केंद्रित है और दूसरा भाग भारतीय अर्थशास्त्रियों को समर्पित है।
पुस्तक में चार उपयोगी परिशिष्ट जोड़े गए हैं, जिनमें प्रमुख अर्थशास्त्रियों के प्रसिद्ध उद्धरण, अर्थशास्त्र से संबंधित प्रमुख पत्रिकाएं, सर्वेक्षण व प्रतिवेदन, भारतीय पंचवर्षीय योजनाएं और नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सूची सम्मिलित की गई है।
यह पुस्तक अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
🔎 विषय सूची संक्षेप में:
पाश्चात्य अर्थशास्त्री एवं उनका चिंतन
-
पूर्व शास्त्रीय अर्थशास्त्री
-
शास्त्रीय अर्थशास्त्री
-
शास्त्रीय अर्थशास्त्रियों के आलोचक
-
नव शास्त्रीय अर्थशास्त्री
-
आधुनिक अर्थशास्त्री
भारतीय अर्थशास्त्री एवं उनका चिंतन
-
प्राचीन भारतीय अर्थशास्त्री
-
आधुनिक भारतीय अर्थशास्त्री
परिशिष्ट:
-
प्रमुख उद्धरण
-
अर्थशास्त्र से संबंधित पत्र-पत्रिकाएं और प्रतिवेदन
-
पंचवर्षीय योजनाएं
-
नोबेल पुरस्कार विजेता
👤 About the Author:
जी.आर. वर्मा ने 1968 में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे राजस्थान सरकार के महाविद्यालयों में 34 वर्षों तक अध्यापन कार्य में संलग्न रहे और 2003 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने छात्रों के लघु शोध कार्यों का निर्देशन किया है और आर्थिक, सामाजिक तथा सम-सामयिक विषयों पर नियमित लेखन भी किया है। इनकी पूर्व प्रकाशित कृति अर्थशास्त्र शब्दकोश (2011) भी विद्वानों और छात्रों के बीच सराही गई है।


