{"product_id":"yapomgalo-lokkathain-hardcover-gumpi-nguso-and-prof-saket-kushwaha-vc-rajiv-gandhi-central-university-arunachal-pradesh","title":"YapomGalo Lokkathain (????? ???? ???-?????) [Hardcover] Gumpi Nguso (?????? ????) and Prof. Saket Kushwaha, VC, Rajiv Gandhi Central University, Arunachal Pradesh","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Gumpi Nguso (गुम्पी ङूसो)\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya Books\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e Ist\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 131\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2021\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e यह सच है कि पुरुष-प्रधान समाज माना गया है और पुरुष के नाम पर वंश आगे चलता है। परन्तु महिलाएँ भी उतनी ही आत्मनिर्भर होती हैं और खुलकर जीती हैं। महिलायें भी महत्त्वपूर्ण निर्णयों में शामिल होती हैं। हमारी बोली में भी लिंग-भेद नहीं है। ये तथ्य हमारी बोली में कुछ इस तरह झलकती है– खाएगा\/खाएगी– दोरह्; सोएगा\/सोएगी– युबरे शादी-ब्याह की रस्में केवल दो दिलों का मेल नहीं या फिर एक अटूट बंधन नहीं बल्कि यह मानव-समाज का विस्तार करने हेतु स्त्री-पुरुष के मध्य स्वेच्छा से प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया गया एक ऐसा आपसी बंधन है जिनके हाथों में इस संसार की बागडोर है। बल्कि यह एक दायित्व है, जिसे हर दम्पति को सही रूप में निभाना चाहिए। किसी एक को इन रस्मों का आरम्भ करना था। कोई भी घर छोड़कर जाना नहीं चाहता है। परन्तु प्रथम विवाह के समय किसी एक को अपना घर छोड़कर जाना तय था। अब यह फैसला करना रह गया था कि कौन बाबुल के आँगन छोड़कर परदेस निकल जाएगा या जाएगी। नारी जाएगी या नर जाएगा। गालो परिवार का मानना है कि यह प्रथा आञे (बड़ी बहन) कारि-कार्या और आचे (बड़े भइया) कारा-कार्बा से आरम्भ हुई है। आञे कारि व आञे कार्या दो बहनें और आचे कार्बा व कारा दो भाई थे। आञे कारि-कार्या ब्याह कर जाएगी या आचे कार्बा-कारा जाएगा। जिन शादी-ब्याह की रस्मों को आज हम समझते हैं और देखते हैं, उसका आरम्भ यहीं से होना था। बड़े प्यार‌‌-दुलार से चारों भाई-बहन एक ही घर में रहकर बड़े हुए थे। कारि-कार्या भी जिद करने लगीं और कार्बा-कारा भी हठी होने लगे। –इसी पुस्तक से\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901239890224,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_B08SBJBXQ1","price":180.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/81B8rswdxML.jpg?v=1780573399","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/yapomgalo-lokkathain-hardcover-gumpi-nguso-and-prof-saket-kushwaha-vc-rajiv-gandhi-central-university-arunachal-pradesh","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}