{"product_id":"vaigyanik-bhautikvad","title":"Vaigyanik Bhautikvad","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Rahul Sankrityayan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 168\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-09-2019\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePart Number:\u003c\/b\u003e 8180318621\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e वैज्ञानिक भौतिकवाद' आज के वैज्ञानिक युग के उस चरण की व्याख्या है जिसमे साइंस के नाम पर मृत विचारों की अपेक्षा नये वैज्ञानिक विचारों व आलोक में मानवीय नैतिकता, धर्म, समाज, दर्शन, मूल्यवत्ता और मानवीय संबंधों की व्याख्या की गयी है | जर्मन दार्शनिक हीगेल ने जिस द्वंद्वात्मक सिद्धांत पर आध्यात्मिकता की व्याख्या की थी, मार्क्स ने उसी द्वंद्वात्मक सिद्धांत के प्रयोग से भौतिकवाद की व्याख्या की | राहुल जी की पुस्तक वैज्ञानिक भौतिकवाद मूलतः द्वंद्वात्मक भौतिकवाद को ही प्रतिपादित करने के लिए लिखी गयी पुस्तक है | पुस्तक को विद्वान लेखक ने तीन मुख्या अध्यायों में बाँटकर, इतिहास, दर्शन, समाजशास्त्र और धर्म आदि की पूरी व्याख्या प्रस्तुत की है | यह पुस्तक राहुल जी ने सबसे पहले 1942 में लिखी थी जबकि देश में गाँधी जी और गांधीवादी का बड़ा प्रबल समर्थन व्याप्त था | इसमें भारतीय सन्दर्भ को लेकर गांधीवाद की विवेचना है | भारतीय चिंतन और दर्शन की दृष्टि से यह पुस्तक सर्वप्रथम भारतीय साहित्य में विशेषकर हिंदी में एक बहुत बड़ी कमी की पूर्ती करती है | दार्शनिक दृष्टि से 'वैज्ञानिक भौतिकवाद' अपनी छोटी-से काया में ही अट्ठारहवी और उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोपीय चिंतन को सूत्र रूप में भारतीय सन्दर्भ के साथ प्रस्तुत करती है | वस्तुतः इस पुस्तक के अध्ययन से कोई भी भारतीय भाषा-भाषी पाश्चात्य चिंतन-प्रणाली को भली-भांति जान सकता है |.\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9788180318627\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 7.4 x 5.0 x 0.7 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66908190802224,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9788180318627","price":168.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/718o6aStfqL.jpg?v=1780769120","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/vaigyanik-bhautikvad","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}