{"product_id":"nirmala-2","title":"Nirmala","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Premchand\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Atlantic Publishers and Distributors\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 202\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 18-04-2025\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e प्रेमचंद द्वारा रचित निर्मला उपन्यास एक पंद्रह वर्षीय लड़की जो बनारस के एक मध्यमवर्गीय परिवार से है, इस पर आधारित है। इस उपन्यास के जरिए प्रेमचंद ने समाज की नारी के प्रति सोच, दहेज प्रथाए नारी की पुरुष पर निर्भरता और अनमोल विवाह जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया है।\u003cbr\u003e\nजो लड़की पहले अपने पिता के जीवित रहते एक अच्छे और समृद्ध परिवार में विवाह के लिए तैयार हो रही थी, वही पिता की मृत्यु के बाद दहेज, समाज की कुरीतियों और कठिन परिस्थितियों के कारण अपनी पूरी जिंदगी एक अधेड़ व्यक्ति के साथ बिताने के लिए विवश हो जाती है, जो उसके पिता की उम्र का है। यही से निर्मला की खुशहाल जिंदगी में एक दुखद त्रासदी की शुरुआत होती है।\u003cbr\u003e\nयह उपन्यास महिला-पुरुष के संबंधों और एक महिला के आंतरिक संघर्षो को सरलता और गहरी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करता है और अंत में गहरा सन्नाटा छोड़ जाता है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9788124806050\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 7.8 x 5.0 x 0.5 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Atlantic Publishers and Distributors","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50071777411376,"sku":"Atlantic_9788124806050","price":195.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/71UEPbCwbuL.jpg?v=1756301343","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/nirmala-2","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}