{"product_id":"nirala-ki-samajik-chetna-hardcover-suresh-acharya-hardcover-suresh-acharya","title":"Nirala ki Samajik Chetna (?????? ?? ??????? ?????) [Hardcover] Suresh Acharya [Hardcover] Suresh Acharya","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Suresh Acharya\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e 2nd\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 254\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2021\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e उनका स्वतन्त्र रचना-संसार है, जिसमें वे प्रबल जनाधार के बूते पर विविध सृष्टियाँ करते हैं। उनकी कविताएँ समाज-व्यवस्था पर चोट करती हैं। परस्पर विरोधाभास भी उनकी रचनाशीलता के सन्दर्भों मेें गुण बन जाता है, क्योंकि इसके द्वारा वे पूर्वाग्रहों से मुक्त रचना-कर्म का निर्वाह करते हैं। अपने सामाजिक मूल्यों को व्यावहारिक धरातल पर ले आना उनका प्रिय शगल है। अपने जीवन के प्रवाह में आई हुई जीवन-स्थितियों और मनोदशाओं को निराला अपनी रचनाधर्मिता के द्वारा बार-बार भोगते और जीते हैं। इसलिए उनकी कविताओं के विषय आमतौर पर उनके रचनाकार के समक्ष चुनौतियाँ बनकर आते हैं, निराला की रचना-दृष्टि उनकी रचनाओं को अभीष्ट प्रयोजन के लिए सामाजिक समग्रता से बहुत सफलता के साथ जोड़ती है। उनका गद्य तो साधारण नागरिक की सामाजिक अस्मिता और अस्तित्व की सच्चाइयों का दस्तावेज है। भारतीय नारी-समाज सम्भवत: भारतीय समाज का सबसे अधिक त्रस्त, शोषित और दु:खी अंग है। निराला उसके बारे में बहुत सजग सामाजिक चिन्तन करते हैं। ‘अलका’ उपन्यास में ‘स्त्री-शिक्षा’ उनका मुख्य उद्‍देश्य है और यही इस उपन्यास की केन्द्रीयता भी है। ‘निरूपमा’ की नायिका भी स्त्री के विद्रोह का ही प्रतिनिधित्व करती है। जब वह समाज से तिरस्कृत और उपेक्षित डॉ. कुमार से विवाह करती है। निराला की नारी-विषयक चिन्तनधारा उनकी इन रचनाओं से उजागर होती है। समाज की रूढ़ियों ने नारियों का सर्वाधिक शोषण किया है। निराला के पात्र इन रूढ़ियों के खिलाफ न केवल टकराव की तैयारी करते हैं अपितु अन्त में सम्पूर्ण सामाजिक बदलाव की भूमिका भी बनाते हैं। उनका एक नायक राजकुमार वेश्यापुत्री से और अजित एक विधवा से विवाह करते हैं। –इसी पुस्तक से\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.5 x 6.5 x 0.7 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901193523504,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_B09MW2QQ5K","price":599.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/71NT5ZYAVaL.jpg?v=1780568142","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/nirala-ki-samajik-chetna-hardcover-suresh-acharya-hardcover-suresh-acharya","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}