{"product_id":"kaun-jaat-ho-bhai-कौन-जात-हो-भाई","title":"Kaun Jaat Ho Bhai | कौन जात हो भाई","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Bachcha Lal Unmesh\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e UNBOUND SCRIPT\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e Special Edition\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 136\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 04-01-2026\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e इन सभी कविताओं में आए समकालीन सामाजिक-राजनैतिक-आर्थिक- सांस्कृतिक विमर्श, बहस, संघर्ष और दलित-बहुजन चेतना को आसानी से देखा जा सकता है । बच्चा लाल ‘उन्मेष’ के संग्रह में शामिल तमाम कविताएँ समाज में फैली असमानता, उत्पीड़न, शोषण, दमन को वर्गीय और जातीय दोनों आधार पर चिह्नित करती हैं और उन पर कड़ा प्रहार करती हैं। एक तरफ़ ये कविताएँ मनुवाद पर आधारित ब्राह्मणवाद की पोल खोलती हैं तो दूसरी ओर दलितों, मज़दूरों, किसानों, स्त्रियों पर होने वाले ज़ुल्म और शोषण की मुख़ालिफ़त करते हुए उनके पक्ष में मज़बूती से खड़े होकर अपनी आवाज़ बुलंद करती हैं। भाषा की दृष्टि से कविताएँ बेहद सरल, पठनीय और दिल को छू जाने वाली हैं। कविता में व्यंग्यात्मक शैली कविता को और पठनीय और वैचारिक बना देती है । -अनिता भारती बच्चा लाल ‘उन्मेष’ की कविता पर पाबंदी ज़रूरी है। यह हमारे शिष्ट आस्वाद पर चोट करती है । यह उस लोकतांत्रिक सहमति को ख़ारिज़ करती है, जिसके नाम पर पिछड़ों और दलितों की राजनीति की जाती है। और सबसे ख़तरनाक बात यह दलितों को याद दिलाती है कि उन्होंने क्या-क्या झेला है और किनके हाथों झेला है । जिस समय इस देश की अदालत सुझाव देती है कि दलित शब्द का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, उस समय यह दलित संज्ञा एक चुनौती की तरह हमारे सामने आती है। सोशल मीडिया ऐसी चुनौतियों से निबटने का तरीक़ा जानता है। लेकिन वह यह नहीं जानता कि पाबंदियाँ रचनाओं को अतिरिक्त शोहरत दे देती हैं, कि सच्चाइयाँ फिर भी बाहर निकलने का रास्ता तलाश लेती हैं। - प्रियदर्शन\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789347125874\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 7.7 x 5.1 x 0.4 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"UNBOUND SCRIPT","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66904493785392,"sku":"DRG.UnboundScripts_9789347125874","price":234.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/81rSls1QjvL.jpg?v=1780661688","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/kaun-jaat-ho-bhai-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}