{"product_id":"kaisae-likhu-ujli-kahani-hardcover-ranjana-jaiswal","title":"Kaisae Likhu Ujli Kahani [Hardcover] Ranjana Jaiswal","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Ranjana Jaiswal\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e Ist\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eFeatures:\u003c\/b\u003e \u003c\/p\u003e\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e1.औरत के लिए 2.कठपुतलियाँ 3.किले में छेद 4.गुनाह के रिश्ते.चुड़ैलें 6.जादूगरनी 7.दर्द से दर्द तक 8.दीप तले अँधेरा 9.दुष्चक्र 10.दूसरा थप्पड़ 11.धारा के विपरीत तैरती लड़की 12.पराकर्षण 13.बाबा जी 14.मुँहजली 15.मृगतृष्णा 16.मेरे बचपन की पहली ‘दबंग’ औरत 17.बाबू जी 18.मैं अपराधिनी हूँ ... 19.यह खाला का घर नहीं है 20.रूपगर्विता 21.सत्ता\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eउस दिन वह गहरी नींद में थी। अचानक उसे अपनी देह पर सर्प रेंगने-सा आभास हुआ। सर्प रेंगता हुआ उसके स्तनों पर बैठ गया था। वह गनगना उठी। भय से उसकी घिग्घी बँध गयी। वह जाग पड़ी थी। जोर से सर्प को उठाकर अपनी छाती से अलग किया... पर ये क्या...यह कोई सर्प नहीं था। ये तो सलमा का हाथ था। वह चिल्ला उठी– ये क्या कर रही थी... ''मैं...मैं...मैं...।'' सलमा हकला उठी। पहले तो उसे लगा। नींद में गलती से शायद सलमा का हाथ उसके स्तनों पर पड़ गया होगा, पर वह तो पूरी तरह जगी हुई थी और अजीब-आवेश में थी। उसकी आँखें लाल थीं।\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 176\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2018\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e 'कैसे लिखूँ उजली कहानी' स्त्रीवादी रचनाकार रंजना जायसवाल का चौथा कहानी संग्रह है। इसमें शामिल कहानियाँ धर्म और पितृसत्तात्मक संरचना के आवरण में विकसित स्त्री-पुरुष के प्रेम तथा यौनिक रिश्तों की पड़ताल करती हैं। इनमें स्त्री और पुरुष के लिए सदियों से स्वीकृत दोहरे मानदंडों, रीतियों, रूढ़ियों और परम्पराओं के खिलाफ बगावत के स्वर हैं। मानवीयता, संवेदना और भावना से लबरेज इन कहानियों की नायिकाएँ स्त्री-व्यक्ति-सत्ता के प्रति सचेत हैं; साथ ही किसी भी प्रकार के समझौते के खिलाफ भी। इन कहानियों के स्त्री-पात्र हाड़-मांस युक्त मनुष्य हैं, देवी नहीं, स्त्री हैं। लिहाजा वे गलती भी करती हैं, जीवन-पथ पर चलती हैं, अपनी राह ढूँढती हैं, कई बार गिरती भी हैं पर हार नहीं मानतीं; उठकर आगे बढ़ती हैं। ये स्त्रियाँ प्रेम करती हैं। प्रेम में धोखा भी खाती हैं, पर अपराध-बोध से ग्रसित नहीं होतीं; टूटकर आत्महत्या नहीं करतीं। यह पाठ मानवीय और समतामूलक मूल्यों पर आधारित है। पितृसत्ता द्वारा निर्मित और प्रसरित पाठ उन्हें नहीं भाता; क्योंकि वहाँ स्त्री-पुरुष दोनों के लिए गैरबराबरी पर टिकी दो प्रकार की मान्यताएं हैं। पितृसत्ता कृत नैतिकता,यौन-वर्जना, पवित्रता, मर्यादा की धारणा पक्षपातपूर्ण हैं और स्त्री को दोयम साबित करनेवाले भी। इस संग्रह की स्त्रियाँ इसका मुखर प्रतिवाद करती हैं। कहानी–च्मैं अपराधिनी हूँज् की नायिका साफ कहती है–च्जब पुरुष अपवित्र नहीं होता तो स्त्री कैसे अपवित्र हो सकती है? च्कैसे लिखूँ उजली कहानी शीर्षक से व्यंजित है कि स्त्री जीवन के अँधेरा का बहुलांश अभी छँटा नहीं है, ऐसे में उजली कहानी कैसे लिखी जाए! इस संग्रह की कहानियाँ बयान करती हैं कि स्त्री से लोकतांत्रिक रिश्ता बनाए बगैर पुरुष स्त्री-देह तो पा सकता है, प्रेम नहीं।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.0 x 6.0 x 1.0 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Retail Maharaj","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901241659696,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_B07K59DW4N","price":188.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/61iIXf1Zm8L.jpg?v=1780573553","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/kaisae-likhu-ujli-kahani-hardcover-ranjana-jaiswal","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}