{"product_id":"kahani-uncle","title":"Kahani Uncle","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Gazanfar\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2011\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9788181437129\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cspan\u003eकहानी अंकल - \u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eकहानी राख से भी चिंगारी कुरेद लेती है। ठंडे अलाव में गर्मी फूँक देती है। बिस्तरों से उठाकर आग के पास बिठा देती है। रात को दिन बना देती है। कहानी रामायण कहती है। अलिफ़ लैला सुनाती है। शाहनामा बयान करती है। महाभारत छेड़ती है। कहानी अकथ की कथा बयान करती है।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eकहानी अंकल उपन्यास में उपन्यासकार ने एक ऐसी आत्मीय कहानी अंकल पात्र का सृजन किया है जो पुराने आख्यानों, लोककथाओं, अलिफ़ लैला और पंचतन्त्र के कथासूत्रों को बिलकुल नये सन्दर्भों में, बड़े दिलचस्प और जज़्बाती लहज़े में बयान करती है।.. .कहानी अंकल पात्र उस ज़माने की याद ताजा कर देता है जब गाँव-देहात में कोई कुशल क़िस्सागो, अलाव के पास बैठकर, बच्चों-बड़ों के बीच रोमांचक क़िस्से बयान करता था।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eवही क़िस्सागोई इस उपन्यास में है। पाठक उपन्यास का सजीव भाषा और पठनीयता से यक़ीनन प्रभावित होंगे।\u003c\/span\u003e\u003cbr\u003e\u003cspan\u003eअन्तिम पृष्ठ आवरण - \u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50081392099632,"sku":"DRG.VaniPrakashan_9788181437129","price":75.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/31tlcSqqVDL.jpg?v=1756300628","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/kahani-uncle","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}