{"product_id":"kadiyan-1","title":"Kadiyan","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Bhishm Sahni\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e 4th\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 184\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-01-2016\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e कड़ियाँ भीष्म साहनी ने अपने लेखन में सामाजिक-नैतिक असंगतियों, मध्यवर्ग के दोहरे मानदंडों, परिवार व विवाह संस्थाओं के विरोधाभासों को निशाना बनाया है। ‘कड़ियाँ’ भीष्म साहनी का महत्त्वपूर्ण उपन्यास है। इसकी विषयवस्तु एक ऐसे मध्यवर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखती है जो परम्परागत संस्कारों में जकड़ा हुआ है, लेकिन इसका मुख्य कथानक दाम्पत्य जीवन की कड़वाहट और स्त्री की असहाय स्थिति से सम्बन्धित है। एक तरफ रूढ़ नैतिक मान्यताएँ हैं जो पति-पत्नी के सम्बन्धों में दरार पैदा कर देती हैं और दूसरी तरफ पत्नी की आर्थिक परनिर्भरता है जिसके कारण उसे अनेक मानसिक यंत्रणाओं से गुजरना पड़ता है। पुरुष प्रधान समाज में स्त्री के हिस्से आनेवाली पीड़ाओं और अत्याचारों का अंकन इस उपन्यास में बहुत बारीकी से किया गया है। तनाव और विघटन के क्षणों को उकेरने में लेखक ने विशेष कौशल का परिचय दिया है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9788126700561\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.3 x 5.4 x 0.5 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66904059543856,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9788126700561","price":290.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/kadiyan-1","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}