{"product_id":"jharkhand-kai-aadivasiyon-ka-itihas-paperback-vinod-kumar","title":"Jharkhand kai aadivasiyon ka Itihas [Paperback] Vinod Kumar","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Vinod Kumar\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Anuugya\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEdition:\u003c\/b\u003e 1\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eFeatures:\u003c\/b\u003e \u003c\/p\u003e\u003cul\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cbr\u003eHistory of Aadivasis of Jharkahad, Literature of Aadivasi, Revolts of Aadivasi, Culture of Aadivasis\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003e\n\u003cbr\u003eLanguage Published: Hindi\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 176\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2019\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePart Number:\u003c\/b\u003e B07MRLG43M\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e सन् 2005 में मेरी एक किताब ‘आदिवासी संघर्षगाथा’ के नाम से प्रकाशित हुई थी। यह किताब उसी पुस्तक का संशोधित और परिवर्धित रूप है जिसमें आदिवासी राष्ट्रीयता बनाम झारखंड राज्य, धनकटनी आंदोलन, माओवाद का प्रवेश और विस्तार, नव गठित राज्य में आदिवासियों की स्थिति आदि चैप्टर जोड़े गये हैं। पुस्तक को तैयार करने में मुख्य रूप से 1902 से 1910 के बीच छोटानागपुर में चले सर्वे सेटलमेंट आपरेशन की फाईनल रिपोर्ट से मदद ली गई है जिसे तत्कालीन सेटलमेंट अफिसर और इंडियन सिविल सर्विस के अधिकारी जे. रीड ने तैयार किया था। कवर का फोटो मेरे मित्र कुमार चंद्र मार्डी के गोड़ग्राम, पोटका, सिंहभूम, स्थित घर का है जहां 1978 के सितंबर माह की एक दुपहरी मैं पहुंच गया था और कुछ वर्ष रहा था। ‘‘गैर आदिवासी समाज ने आदिवासी क्षेत्र को अपना आंतरिक औपनिवेश बना कर यहां के श्रम और खनिज संपदा का भीषण दोहन और शोषण तो किया ही, अपने ही इलाके में उन्हें अल्पसंख्यक बना दिया। वैसे तो अंग्रेजों के जमाने में ही आदिवासी क्षेत्र में बहिरागतों का बडे पैमाने में प्रवेश हो चुका था और 1901 की जनगणना में आदिवासियों मूलवासियों की आबादी लगभग 46 प्रतिशत रह गयी थी, लेकिन आज उनकी आबादी झारखंड क्षेत्र में महज 26 प्रतिशत रह गयी है और हालत यह कि अब बड़ी बेशर्मी से जनजातीय क्षेत्रों को फिर से गठित करने की मांग होने लगी है.’’\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 9.0 x 6.0 x 1.0 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Anuugya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66901233795376,"sku":"DRG.AnuugyaBooks_B07MRLG43M","price":250.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/61rBLmk6HqL.jpg?v=1780572832","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/jharkhand-kai-aadivasiyon-ka-itihas-paperback-vinod-kumar","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}