{"product_id":"hari-ghaas-ki-chhappar-wali-jhopadi-aur-bauna-pahad-1","title":"Hari Ghaas Ki Chhappar Wali Jhopadi Aur Bauna Pahad","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Vinod Kumar Shukla\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eFeatures:\u003c\/b\u003e \u003c\/p\u003e\u003cul\u003e\n\u003cli\u003eBook - hari ghaas ki chhappar wali jhopadi aur bauna pahad\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eLanguage: hindi\u003c\/li\u003e\n\u003cli\u003eBinding: paperback\u003c\/li\u003e\n\u003c\/ul\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e paperback\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 136\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-12-2018\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e विनोद कुमार शुक्ल ने उपन्यास के क्षेत्र में एक नए मुहावरे का आविष्कार किया है। वे उपन्यास के फ़ार्म की जड़ता को जड़ से उखाड़कर, सजगतापूर्वक नए फ़ार्म और शिल्प का लहलहाता हुआ नया संसार रचते हैं। ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़’ उनका चर्चित उपन्यास है। इसे विनोद जी ने किशोर, बड़ों और बच्चों का उपन्यास माना है। इस उपन्यास में बच्चों की मित्रता के साथ ही अमलताश वाला पेड़ है, हरेवा नाम का पक्षी है, बुलबुल, कोतवाल, शौबीजी, किलकिला, दैयार, दर्जी, मधुमक्खी का छत्ता और छोटा पहाड़ है। इसे फ़ैंटेसी कहें या जादुई यथार्थवाद या फिर हो सकता है कि आलोचकों को विनोद जी की इस भाषा, शैली और कल्पनाशीलता के लिए कोई नया ही नाम गढ़ना पड़े। फ़ंतासी की इस बुनावट में एक ताज़गी और नयापन है। गल्प व कल्प की जुगलबन्दी में गद्य और पद्य की सीमा रेखा मिटती जाती है। सच तो यह है कि विनोद कुमार शुक्ल के कल्पना-जगत में भी वास्तविक संसार ऐसा है जो जीवन्त और रचनात्मकता के आनन्द से भरा-पूरा है। उपन्यास में बच्चों की सपनीली दुनिया जैसी सुन्दर बातें हैं। भाषा की चमक के साथ भाषा का संगीत भी कथा को मोहक बनाता है। भाषा का आन्तरिक गठन कथ्य के साथ ही वर्तमान के बोध को भी जीवन्त बनाता है। हमारी और बच्चों की भागती-दौड़ती ज़िन्दगी में मीडिया की मायावी संस्कृति, सबको बाज़ार या ग्लोबल मंडी में जकड़ लेना चाहती है, इन्टरनेट, चिटचेट के साथ उत्तेजनामूलक समाचारों के बीच परम्परा और संस्कृति में मिली दादी-नानी की कहानियों से बच्चे दूर होते जा रहे हैं। ऐसे जटिल समय में भी प्रकृति और परम्परा से सम्पृक्त ‘हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी’ उपन्यास की यह नई संरचना अनूठी है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789388183123\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 16.7 x 8.5 x 0.6 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66904022253872,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9789388183123","price":208.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/712CS7eIaGL.jpg?v=1780653596","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/hari-ghaas-ki-chhappar-wali-jhopadi-aur-bauna-pahad-1","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}