{"product_id":"garud-kisne-dekha-hai","title":"Garud Kisne Dekha Hai","description":"\u003cp\u003e\u003cb\u003eAuthor:\u003c\/b\u003e Shrikant Verma\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBrand:\u003c\/b\u003e Rajkamal Prakashan\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eBinding:\u003c\/b\u003e hardcover\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eNumber Of Pages:\u003c\/b\u003e 121\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eRelease Date:\u003c\/b\u003e 01-07-2019\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePart Number:\u003c\/b\u003e 9388933133\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eDetails:\u003c\/b\u003e ‘गरुड़ किसने देखा है’ श्रीकान्त वर्मा का छठा काव्य-संग्रह है, जो उनके निधन के लगभग वर्ष-भर बाद प्रकाशित हो रहा है। उनका पिछला संग्रह ‘म’ कवि की संवेदना को जिस निर्णायक बिन्दु पर छोड़ गया था, प्रस्तुत संग्रह उसके बाद की रचनात्मक यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है। यहाँ एक ही साथ एक कलात्मक परिणति तक पहुँचे हुए कवि की परिपक्वता भी मिलेगी और एक नये प्रस्थान की छटपटाहट भी। यहाँ तक आते-आते कवि का अनुभव-लोक नयी भावभूमियों के संस्पर्श से और समृद्ध हुआ है और शायद इसी के चलते कवि की भाषा में एक नयी सरलता आयी है और एक पारदर्शी विनयशीलता भी, जो सिर्फ श्रेष्ठ कविता में पायी जाती है। इस संग्रह की कविताओं का एक छोर काशी को छूता है, दूसरा सुदूर पेरिस को और इस तरह बनता है कवि की रचनात्मक यात्रा का एक पूरा इतिहास और भूगोल—और दोनों अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही साथ। प्रस्तुत संग्रह की कविताएँ बीसवीं शताब्दी के अँधेरे से निकलने की कोशिश से पैदा होनेवाली कविताएँ हैं। इसीलिए यहाँ केवल अतीत की पीड़ा और वर्तमान की कड़वाहट-भर ही नहीं, ‘भविष्य को न भुला पाने’ की एक रचनात्मक तड़प भी है। मृत्यु के विरुद्ध लड़ते हुए कवि की इन कविताओं में जीवन का एक गहरा स्वीकार है और उसके प्रति एक सच्ची, पीड़ाभरी मानवीय ललक भी। यही बात ‘गरुड़ किसने देखा है’ को विशिष्ट बनाती है और सार्थक भी। कवि के ही शब्दों में— कितना लुभावना कितना सरल निरर्थक होते हुए भी सार्थक है यह संसार।.\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eEAN:\u003c\/b\u003e 9789388933131\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003ePackage Dimensions:\u003c\/b\u003e 8.8 x 5.7 x 0.6 inches\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eLanguages:\u003c\/b\u003e Hindi\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66904004788528,"sku":"DRG.UnboundDistribution_9789388933131","price":274.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0690\/9968\/4144\/files\/61nGUs2NOtL.jpg?v=1780653121","url":"https:\/\/www.retailmaharaj.com\/bn\/products\/garud-kisne-dekha-hai","provider":"Retail Maharaj","version":"1.0","type":"link"}